संस्कृत

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  • भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतम् संस्कृतिस्तथा ।
( भारत की प्रतिष्ठा दो चीजों में निहित है , संस्कृत और संस्कृति । )
  • संस्कृत साहित्य का यूरोप पर इतना अधिक बौद्धिक ऋण है कि उसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता। आने वाले वर्षों में यह ऋण और बढ़ने की सम्भावना है। हम तो अपनी वर्णमाला तक को परिपूर्ण नहीं बना पाए हैं। (प्रोफ मैक्डोनेल)
  • संस्कृत भाषा की प्राचीनता जो भी हो, इसकी संरचना आश्चर्यजनक है। यह ग्रीक से अधिक पूर्ण (दोषरहित) है, लैटिन से अधिक शब्दबहुल है, और इन दोनों की अपेक्षा अधिक उत्कृष्टतापूर्वक परिशोधित है; फिर भी क्रियाओं के मूलों के रूप में और व्याकरण के रूपों में, इसका इन दोनों भाषाओं के साथ बहुत मजबूत सम्बन्ध दिखता है, जिसके केवल संयोग से उत्पन्न होने की स्म्भावना कम है। इन तीनों में इतना मजबूत सम्बन्ध है कि इनका विश्लेषण करके कोई भी भाषाशास्त्री इनके समान स्रोत से निकलने के ही निष्कर्ष पर पहुंचेगा। किन्तु वह स्रोत अब शायद बचा नहीं नहीं है। (विलियम जोन्स)
  • संस्कृत विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा है। (मैक्स मूलर)
  • संस्कृत के अध्ययन के बिना कोई व्यक्ति सच्चा भारतीय और सच्चा विद्वान नहीं हो सकता। -- महात्मा गांधी
  • संस्कृत हमारे रक्त में प्रवाहित होती है। केवल संस्कृत ही इस देश की एकता को स्थापित कर सकती है। (डॉ सी वी रमन, संस्कृत को भारत की राजभाषा बनाए जाने के प्रश्न पर)
  • यदि आपको एक भाषा स्वीकार करनी है तो विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा क्यों नहीं स्वीकार करते? (नजीरुद्दीन अहमद, संविधान सभा में भारत की राजभाषा पर चर्चा के समय)
  • संस्कृत एक समय विश्व की एकमात्र भाषा थी। यह भाषा ग्रीक और लैटिन से अधिक परिपूर्ण और विपुल है। (Prof. Bopp)
  • मैं निम्न जाति के लोगों से कहना चाहता हूँ कि अपनी स्थिति को ऊँचा उठाने का एकमात्र रास्ता संस्कृत का अध्ययन है और यही उनकी एकमात्र सुरक्षा है। आप लोग संस्कृत के विद्वान क्यों नहीं बनते? भारत की सभी जातियों तक संस्कृत शिक्षा पहुँचाने के लिए आप करोड़ों क्यों नहीं लगाते? यही प्रश्न है। जिस क्षण आप यह करेंगे, आप ब्राह्मण के बराबर हो जाएंगे। (स्वामी विवेकानन्द)
  • संस्कृत भाषा, देवभाषा है। यह सत्य युग की भाषा है जो वाक् और अर्थ के सत्य और पूर्ण सम्बन्ध पर आधारित है। इसके प्रत्येक स्वर और व्यञ्जन में एक विशेष अन्तर्भूत शक्ति है जो उनकी प्रकृति के कारण है, किसी विकास के कारण या मानव द्वारा चुना हुआ नहीं है। (श्री अरविन्द , ‘Hymns to the Mystic Fire’)
  • सभ्यता के इतिहास में, पुनर्जागरण के बाद, अट्ठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में संस्कृत साहित्य की खोज से बढकर विश्वव्यापी महत्व की कोई दूसरी घटना नहीं घटी है। (आर्थर अन्थोनी मैक्डोनेल्)