योग

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आसन, योग के आठ अंगों में से एक है। सर्वाङ्गासन = सभी अंगों का आसन

योग, प्राचीन भारत में उद्भूत शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक क्रिया है जिसका उद्देश्य मन को स्थायी शान्ति प्रदान करना है ताकि आत्मसाक्ष्त्कार किया जा सके। पतंजलि द्वारा रचित 'योगसूत्र' योग का प्रधान ग्रन्थ है। योगदर्शन, भारत के छः आस्तिक दर्शनों में से एक है। १९वीं और २०वीं शताब्दी में भारत से निकलकर अनेग योग-गुरु पश्चिमी देशों में जाकर योग का प्रचार-प्रसार किये।

उक्तियाँ[सम्पादन]

  • योगः चित्तवृत्तिनिरोधः -- पतञ्जलि योगसूत्र
अर्थ : चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है।
  • योगः समाधिः -- वेद व्यास
अर्थ : योग नाम समाधि का है।
  • जीवन जीने की कला ही योग है। -- श्रीराम शर्मा आचार्य
  • ध्यान योगेन सम्यश्यदगतिस्यान्तरामनः। -- मनुस्मृति 16/731
अर्थ : ध्यान योग से भी योग आत्मा को जाना जा सकता है। अतः योगपरायण ध्यान होना चाहिए।
  • यदा पंचावतिष्ठनते ज्ञानानि मनसा सह।
बुद्धिश्च न विचेष्टति तामाहुः परमा गति॥
तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रिय धारणाम्।
अप्रमत्तस्दा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ॥ -- कठोपनिषद-2/3/10-11
अर्थात् जब पाँचों ज्ञानेन्द्रियाँ मन के साथ स्थिर हो जाती हैं, और मन निश्चल बुद्धि के साथ आ मिलता है, इस अवस्था को परमगति कहते है। इन्द्रियों की स्थिर धारणा ही योग है। जिसकी इन्द्रियाँ स्थिर हो जाती हैं, उसमें शुभ संस्कारों की उत्पत्ति और अशुभ संस्कारों का नाश होने लगता है। यही अवस्था योग की है।
  • पुरूष प्रकृत्योतियोगेऽपि योग इत्यभिधीयते। -- सांख्यशास्त्र
अर्थात् प्रकृति-पुरुष का पृथकत्व स्थापित कर, अर्थात् दोनो का वियोग करके पुरुष के स्वरुप में स्थिर हो जाना योग है।
  • श्रद्धाभक्तियोगावदेहि। -- कैवल्योपनिषद्
अर्थात् श्रद्धा भक्ति और ध्यान के द्वारा आत्मा को जानना ही योग है।
  • संयोगो योग इत्यक्तो जीवात्मा-परमात्मनो। -- याज्ञवल्यक स्मृति
अर्थात् जीवात्मा परमात्मा के मिलन को योग कहते है।
  • ब्रह्म प्रकाशनम् ज्ञानं योगस्थ त्रैचित्तता।
चित्त वृत्ति निरोधश्च जीवन ब्रह्मामात्मनो परः॥ -- अग्नि पुराण 183/1-2
अर्थात् ज्ञान का प्रकाश पड़ने पर चित्त ब्रह्म में एकाग्र हो जाता है। जिससे जीव का ब्रह्म में मिलन हो जाता है। ब्रह्म में चित्त की यह एकाग्रता ही योग है।
  • जीवात्मा परमार्थोऽयमविभागः परमतपः
सः एव परोयोगः समासा कथितस्तव॥ -- स्कन्धपुराण
अर्थात् जीवात्मा व परमात्मा का अलग-अलग होना ही दुःख का कारण है। और इस का अपृथक भाव ही योग है। एकत्व की स्थिति ही योग है।
  • योग निरोधो वृत्तेस्तु चितस्य द्विज सत्तमा। -- लिंगपुराण
अर्थात् चित्त की सभी वृत्तियों का निरोध हो जाना, उसे पूर्ण समाप्त कर देना ही योग है। उसी से परमगति अर्थात् ब्रह्म की प्राप्ति होती है।
  • तदनारम्भ आत्मस्ये मनसि शरीरस्य दुःखाभावः संयोगः। -- वैशेषिक सूत्र 6/2/16
अर्थात् मन आत्मा में स्थिर होने पर उसके (मन के काय का) अनारम्भ है, वह योग है।
  • योगस्थ कुरु कर्माणि संगत्यक्त्वा धनंजय।
सिद्धयसिद्धयोः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥ -- गीता 2/48
अर्थात् योग में स्थिर हो कर कर्म फल का त्याग करे और सिद्ध-असिद्ध में सम होकर कर्मों को करे, यही समता ही योग है।
  • बुद्धि युक्तो जहातीहं उभय सुकृत दुष्कृते।
तस्माद्योगाय युज्जस्व योगः कर्मसु कौशलम्॥ -- गीता 2/50
अर्थात् कर्मो में कुशलता का नाम ही योग है। कर्मों की कुशलता का तात्पर्य यह है कि हमे कर्म इस प्रकार से करने चहिए कि वे बन्धन का कारण ना बनें। अनासक्त भाव से अपने कर्तव्य कर्मों का निर्वहन करना ही कर्म योग है।
  • तं विद्याय दुःख संयोग वियोगं योग संज्ञितम्।
स निश्चयेन योक्ताव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा॥
अर्थात् उस योग को उत्साह, श्रद्धा, धैर्य, से समाहित चित्त से निश्चय पूर्वक करना चाहिए। इस दुख रुप संसार के संयोग से रहित है, वह योग है।
  • एकत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथैव च।
सर्वभाव परित्यागो योग इत्यभिधीयते॥ -- मैत्रायणी उपनिषद् 6/25
अर्थात् प्राण, मन व इन्द्रियों का एक हो जाना, एकाग्रावस्था को प्राप्त कर लेना, बाह्म विषयों से विमुख होकर इन्द्रियों का मन में और मन

आत्मा में लग जाना,प्राण का निष्चल हो जाना योग है।

  • योऽपानप्राणयोरैक्यं स्वरजोरेतसोस्तथा।
सूर्याचन्द्रमसोर्योगो जीवात्मपरमात्मनो:।
एवंतु़द्वन्द्व जालस्य संयोगो योग उच्यते॥ -- योगषिखोपनिषद् 1/68-69
अर्थात् अपान और प्राण की एकता कर लेना, स्वरज रूपी महाशक्ति कुण्डलिनी को स्वरेत रूपी आत्मतत्त्व के साथ संयुक्त करना, सूर्य अर्थात् पिंगला और चन्द्र अर्थात् इड़ा स्वर का संयोग करना तथा परमात्मा से जीवात्मा का मिलन योग है।
  • सलिबे सैन्धवं यद्वत साम्यं भजति योगत:।
तयात्ममनसोरैक्यं समाधिरभी घीयते॥ -- हठयोग प्रदीपिका (4/5)
अर्थात् जिस प्रकार नमक जल में मिलकर जल की समानता को प्राप्त हो जाता है, उसी प्रकार जब मन वृत्तिशून्य होकर आत्मा के साथ ऐक्य को प्राप्त कर लेता है तो मन की उस अवस्था का नाम समाधि है।
  • मन के संवेगो पर नियन्त्रण ही योग है। -- महोपनिषद्
  • जीवन को बिना खोए भगवान की प्राप्ति योग है। -- महर्षि अरविन्द
  • प्राचीन आर्ष ग्रन्थो का अध्ययन ही योग है। -- स्वामी विवेकानन्द
  • निःस्वार्थ भावना से कर्म करना ही सच्चे धर्म का पालन है, और यही वास्तविक योग है। -- गुरु ग्रन्थ साहिब
  • शिव व शक्ति का मिलन को योग कहते हैं। -- रागेय राधव, ‘गोरखनाथ और उनका युग’ में
  • संसार सागर से पार होने की युक्ति का नाम ही योग है। -- योग वाशिष्ठ
  • योग के द्वारा मनुष्य अपने वास्तविक स्वरुप सद्-चित्-आनन्द का अनुभव कर लेता है। -- महर्षि वशिष्ठ
  • अपना अभ्यास करो और सब कुछ आ रहा है। -- श्री के पट्ठाबी जॉइस
  • आज के इस भागमभाग भरी जिन्दगी में हम सब अपने आप से ही अलग हो गये है इसलिए योग हमें अपने आप से पुन: जोड़ने में में मदद करता है।
  • आप कौन हैं इस बारे में उत्सुक होने के लिए योग एक सही अवसर है। -- जेसन क्रैंडल
  • आप योग नहीं कर सकते। योग आपकी प्राकृतिक अवस्था है। आप जो कर सकते हैं वो है योग व्यायाम , जो ये उजागर कर सकता है कि आप कहाँ अपनी प्राकृतिक अवस्था का विरोध कर रहे हैं। -- शेरोन गैनन
  • आपका मन आपका औज़ार है। इसका मालिक बनना सीखें गुलाम नहीं। -- अज्ञात
  • एक फोटोग्राफर लोगों से उसके लिए पोज दिलवाता है। एक योग प्रशिक्षक लोगों से खुद के लिए पोज दिलवाता है। -- टी गिलेमेट्स
  • एक सर्जन हमेसा गर्भवती महिलाओं को योग का अभ्यास करने के लिए सलाह देता हैं क्योंकि योग के द्वारा उन्हें स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
  • एलर्जी को रोकने के लिए ऊर्जा उत्पन्न करें। -- बाबा रामदेव
  • कर्म योग में कभी कोई प्रयत्न बेकार नहीं जाता, और इससे कोई हानि नहीं होती। इसका थोड़ा सा भी अभ्यास जन्म और मृत्यु के सबसे बड़े भय से बचाता है। -- भगवद गीता
  • कर्म योग वास्तव में एक बड़ा रहस्य है। योग मन की दुखो की समाप्ति है। -- भगवद गीता
  • कहा जाता है कि एक व्यक्ति को योग के द्वारा स्वयं के साथ मिलना है जब पूरी तरह अनुशासित होकर अपने मन से सभी इच्छाओं से नियन्त्रण प्राप्त कर लेते हैं तब हम अपने आप को जान पाते है।
  • जब आप सांस लेते हैं , आप भगवान से शक्ति ले रहे होते हैं। जब आप सांस छोड़ते हैं तो ये उस सेवा को दर्शाता है जो आप दुनिया को दे रहे हैं। -- . बी के एस आयंगर
  • जब तक आपने अभ्यास नहीं किया है , सिद्धांत बेकार है। अभ्यास करने के बाद, सिद्धांत ज़ाहिर है। -- डेविड विलियम्स
  • जब पुछा गया उसे अपने जन्मदिन पर क्या उपहार चाहिए , योगी बोला : मुझे किसी उपहार की नहीं बस आपके उपस्थिति की कामना है। -- अज्ञात
  • जब सांसें विचलित होती हैं तो मन भी अस्थिर हो जाता है। लेकिन जब सांसें शांत हो जाती हैं , तो मन भी स्थिर हो जाता है, और योगी दीर्घायु हो जाता है। इसलिए , हमें श्वास पर नियंत्रण करना सीखना चाहिए। -- हठयोग प्रदीपिका
  • जो कोई भी अभ्यास करता है वह योग में सफलता पा सकता है लेकिन वो नहीं जो आलसी है। केवल निरंतर अभ्यास ही सफलता का रहस्य है। -- स्वात्मरामा
  • जो कोई व्यक्ति भी अभ्यास करता है वह योग के द्वारा सफलता प्राप्त कर सकता है लेकिन आलसी व्यक्ति के लिए योग का कोई महत्व नहीं है और निरंतर अभ्यास अकेले सफलता का रहस्य है।
  • धन्य हैं वे लचीले लोग, क्योंकि उनके आकार को नहीं बिगड़ना पड़ेगा। -- अज्ञात
  • ध्यान का बीज बोएं और मन की शांति का फल पाएं। -- अज्ञात
  • ध्यान से ज्ञान आता है; ध्यान की कमी अज्ञानता लाती है। अच्छी तरह जानो कि क्या तुम्हे आगे ले जाता है और क्या तुम्हे रोके रखता है, और उस पथ को चुनो जो ज्ञान की ओर ले जाता है। -- बुद्ध
  • ध्यान से परे ‘अब’ का अनुभव है। -- रयान पैरेंटी
  • नियमित योग अभ्यास करने से मनुष्य को तनाव से दूर रहने में तो मद्द मिलती ही है साथ ही बुरे दौर से उभरने में भी मद्द मिलती है। योग मनुष्य को एक खुशहाल और समृद्ध जीवन प्रदान करने में अपनी प्रमुख भूमिका निभाता है।
  • प्राणायाम बुनियादी सांस लेने का व्यायाम है जो ऑक्सीजन को तुम्हारे शरीर के सभी भागों तक पहुँचाने में मदद करता है जिससे न सिर्फ कोशिकाओं को फिर से जीवंत कर देता है बल्कि तुम्हारे अंदर बहुत सारी ऊर्जा भी भर देता है। मेरे अनुसार , एक इंसान को छः घंटे सोना, एक घंटा योग , एक घंटा दैनिक दिनचर्या , दो घंटा परिवार और १४ घंटा कड़ी मेहनत करना चाहिए। -- बाबा रामदेव
  • बाहर क्या जाता है उसे आप हमेशा कंट्रोल नहीं कर सकते हैं। लेकिन अंदर क्या जाता है उसे आप हमेशा कंट्रोल कर सकते हैं। -- . श्री योग
  • मन की शांति के लिए सबसे अच्छा साधन योग हैं।
  • मेरे लिए, योग सिर्फ एक कसरत नहीं है – यह अपने आप पर काम करने के बारे में है। -- मैरी ग्लोवर
  • मैं योग को प्यार करता हूँ क्योंकि यह न केवल यह हमारे शरीर के लिए कसरत है बल्कि हमारी श्वास भी है जो अत्यधिक तनाव को मुक्त करने में मदद करता है योग सचमुच हमे दिन की दिनचर्या के लिए तैयार करता है।
  • यदि शरीर व मन स्वस्थ नही हैं।
  • यह योग उसके लिए संभव नहीं है जो बहुत अधिक खाता है , या जो बिलकुल भी नहीं खाता ; जो बहुत अधिक सोता है , या जो हमेशा जगा रहता है। -- भगवद गीता
  • योग 99% अभ्यास और 1% सिद्धांत है। -- श्री कृष्ण पट्टाभि जॉइस
  • योग आपके मन को शांत करने का एक प्राचीन तरीका है।
  • योग आपको स्वीकार करता है और प्रदान करता है।
  • योग एक तरह से लगभग संगीत जैसा है; इसका कोई अंत नहीं है। -- स्टिंग
  • योग एक धर्म नहीं है। यह एक विज्ञान है, सलामती का विज्ञान, यौवन का विज्ञान, शरीर, मन और आत्मा को एकीकृत करने का विज्ञान है। -- अमित रे
  • योग एक लाभदायक प्रक्रिया है, जो न सिर्फ मनुष्य को चुनौतीपूर्ण बीमारियों से छुटकारा दिलवाने में मदद करती है बल्कि उन्हें आजीवन स्वास्थ्य रखने में भी उपयोगी साबित होती है।
  • योग करने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण उपकरण जो आपको चाहिए होंगे वो हैं आपका शरीर और आपका मन। -- रॉडने यी
  • योग का आसन, जाने के लिए एक अच्छी जगह है जब टॉक थेरेपी और एंटीडेप्रेसेन्ट्स पर्याप्त न हों। -- एमी वेंट्रौब
  • योग के पास उन मेन्टल पैटर्न्स को शार्ट सर्किट करने के बड़े शातिर और चालाक तरीके हैं जो चिंता पैदा करते हैं। -- बैक्सटर बेल
  • योग के बारे में यह कभी भी मत सोचिये की योग से क्या मिल सकता है बल्कि यह सोचिये की योग के द्वारा हम क्या नही प्राप्त कर सकते है।
  • योग को दृढ संकल्प और अटलता के साथ बिना किसी मानसिक संदेह या संशय के साथ किया जाना चाहिए। -- भगवद गीता
  • योग न सिर्फ मनुष्य के मस्तिष्क और शरीर की एकता को संगठित करता है बल्कि यह मनुष्य के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करता है। योग से मनुष्य का मन शांत रहता है और उसे अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करने में मदद मिलती है।
  • योग बहुत ही आश्चर्यजनक है इससे हमारे स्वास्थ्य की समस्याएं दूर तो होती हैं तथा साथ में खुद का अवलोकन होता भी होता है।
  • योग भी अब व्यवसाय के रूप में बदल रहा है और कई लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहा है।
  • योग मन के उतार-चढ़ाव को स्थिर करने की प्रक्रिया है।
  • योग मन को शांत करने का अभ्यास है।
  • योग मन को शांति में स्थिर करना है। जब मन स्थिर हो जाता है , हम अपनी आवश्यक प्रकृति में स्थापित हो जाते हैं , जोकि असीम चेतना है। हमारी आवश्यक प्रकृति आम तौर पर मस्तिष्क की गतिविधियों द्वारा ढक दी जाती है। -- पतंजलि
  • योग मन को स्थिर करने की क्रिया है। -- पतंजलि
  • योग मनुष्य को सफल बनाने में भी उसकी मदद करता है। वहीं नियमित रुप से किया गया योग अभ्यास मनुष्य को एक बेहतर शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक स्वास्थ्य की तरफ ले जाता है।
  • योग यौवन का फव्वारा है। आप उतने ही नौजवान हैं जितनी आपके रीढ़ की हड्डी लचीली है। -- बॉब हार्पर
  • योग वह प्रकश है जो एक बार जला दिया जाए तो कभी कम नहीं होता। जितना अच्छा आप अभ्यास करेंगे , लौ उतनी ही उज्जवल होगी। -- . बी के एस आयंगर
  • योग विश्राम में उत्साह है। दिनचर्या में स्वतंत्रता। आत्म नियंत्रण के माध्यम से विश्वास। भीतर ऊर्जा और बाहर ऊर्जा । -- यम्बर डेलेक्टो
  • योग सिर्फ आत्म सुधार के बारे में नहीं बतलाता है, बल्कि यह आत्म स्वीकृति के बारे में सिखाता है।
  • योग सिर्फ कसरत ही नहीं है बल्कि यह खुद अपने आप पर काम करता है।
  • योग से सिर्फ रोगों, बीमारियों से छुटकारा ही नही मिलता है बल्कि यह सबके कल्याण की गारंटी भी देता है।
  • योग स्वीकार करता है। योग प्रदान करता है। -- एप्रिल वैली
  • योग हम सभी को नकारात्मकता से दूर रखता है और हमारे मस्तिस्क में अच्छे विचारों का निर्माण करता है। वहीं मनुष्य योग के द्धारा अपनी जीवनशैली में बदलाव कर सकता है और एक सुखी और स्वस्थ जीवन जी सकता है।
  • योग हमारी कमियों पर प्रकाश डालता हैं।
  • योग हमारे जीवन की शक्ति, ध्यान करने की क्षमता और उत्पादकता को बढ़ाता है योग मनुष्य के शरीर, मन और भावना को स्थिर और नियंत्रित भी करता है।
  • योग हमें उन चीजों को ठीक करना सिखाता है जिसे सहा नहीं जा सकता और उन चीजों को सहना सिखाता है जिन्हे ठीक नहीं किया जा सकता। -- . बी के एस आयंगर
  • योग हमे खुशी, शांति और पूर्ति की एक स्थायी भावना प्रदान करता है।
  • योग हर उस व्यक्ति के लिए संभव है जो वास्तव में इसे चाहता है। योग सार्वभौमिक है ….लेकिन योग को सांसारिक लाभ हेतु एक व्यवसायिक दृष्टिकोण से ना अपनाएं। -- श्री कृष्ण पट्टाभि जॉइस
  • योग हर वह व्यक्ति के कर सकता है जो वास्तव में इसे चाहता है क्योंकि योग सार्वभौमिक है।
  • योगा हमे वो ऊर्जा प्रदान करता है जो हम हज़ारो घंटे भी अपना काम करके अर्जित नहीं कर सकते। ।
  • रोना उच्चतम भक्ति गीतों में से एक है। जो रोना जानता है, वह साधना जानता है। यदि आप सच्चे दिल से रो सकें, तो इस प्रार्थना के तुल्य कुछ भी नहीं है। रोने में योग के सभी सिद्धांत शामिल हैं। -- कृपालवानंदजी
  • व्यायाम गद्य की तरह है , जबकि योग गति की कविता है। एक बार जब आप योग का व्याकरण समझ जाते हैं ; आप अपने गति की कविता लिख सकते हैं। -- अमित रे
  • शरीर आपका मंदिर है। आत्मा के निवास के लिए इसे पवित्र और स्वच्छ रखिये। -- . बी . के . एस आयंगर
  • शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए योग और ध्यान अपनाये।
  • सभी बीमारियों का उपचार योग और स्वस्थ जीवन शैली में निहित है। -- बाबा रामदेव
  • सभ्यता द्वारा घायल हुए लोगों के लिए, योग सबसे बड़ा मरहम है। -- टी गिलेमेट्स
  • सांसें अंदर लो , और ईश्वर तुम तक पहुँचता है। सांसें रोके रहो , और ईश्वर तुम्हारे साथ रहता है। सांसें बाहर निकालो, और तुम ईश्वर तक पहुँचते हो। सांसें छोड़े रहो , और ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाओ। -- कृष्णामचार्य
  • स्वस्थ जीवन जीना जिंदगी की जमा पूंजी, योग करना रोगमुक्त जीवन की कुंजी…।
  • स्वास्थ सबसे बड़ा उपहार हैं, संतोष सबसे बड़ा धन हैं, यह दोनों योग से ही मिलते हैं।
  • हमारा स्वास्थ्य ही असली धन है न कि सोने और चांदी के टुकड़े, इसलिए योग के द्वारा इसे बनाये रखे।
  • हमारे पास प्राचीनकाल में स्वास्थ्य बीमा नहीं था लेकिन हम सभी के के पास योग एक ऐसा अभ्यास है जो बिना एक पैसे खर्च किये हमारे स्वास्थ्य की आश्वासन देता है।

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