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छल

विकिसूक्ति से
  • उनसे मत डरो जो बहस करते हैं, उनसे डरो जो छल करते हैं। -- डेल कारनेगी
  • मनुष्य स्वभाव से देवतुल्य है। जमाने के छल-प्रपंच या और परिस्थितियों के वशीभूत होकर वह अपना देवत्व खो बैठता है। -- प्रेमचन्द
  • पाप, दुराचार, अनीति, छल एवं अपराधों की प्रवृत्तियां जहाँ पनप रही होंगी वहाँ प्रगति का मार्ग रुक जाएगा। -- श्रीराम शर्मा
  • निर्मल मन जन सो मोहि पावा । मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥ -- रामचरितमानस में श्रीराम का वक्तव्य

इन्हें भी देखें[सम्पादन]