गुरु गोविन्द सिंह

विकिसूक्ति से
Jump to navigation Jump to search

गुरु गोविन्द सिंह सिखों के दशम गुरु थे। आपने खालसा पन्थ की स्थापना की।

विचार[सम्पादन]

  • जब बाकी सभी तरीके विफल हो जाएं, तो हाथ में तलवार उठाना सही है।
  • ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में अच्छे काम करें और बुराई को दूर करें।
  • अगर आप केवल भविष्य के बारे में सोचते रहेंगे तो वर्तमान भी खो देंगे।
  • चिड़िया ते में बाज़ लड़ावा, गिद्रं तो में शेर बनाउन, सवा लाख से एक लड़ावा, तबे गोबिंद सिंह नाम कहउँ।
  • जब कोई व्यक्ति अपने भीतर से स्वार्थ उन्मूलन करता है तो वह अपने अंदर सबसे बड़ा आराम और स्थायी शांति कि अनुभूति करता है।
  • जब आप अपने अंदर से अहंकार मिटा देंगे तभी आपको वास्तविक शांति प्राप्त होगी।
  • मैं उन लोगों को पसंद करता हूँ जो सच्चाई के मार्ग पर चलते हैं।
  • मुझे उसका सेवक मानो। और इसमें कोई संदेह मत रखो।
  • असहायों पर अपनी तलवार चलाने के लिए उतावले मत हो, अन्यथा विधाता तुम्हारा खून बहायेगा।
  • उसने हेमशा अपने अनुयायियों को आराम दिया है और हर समय उनकी मदद की है।
  • हे ईश्वर मुझे आशीर्वाद दें कि मैं कभी अच्छे कर्म करने में संकोच ना करूँ।
  • ये मित्र संगठित हैं, और फिर से अलग नहीं होंगे, उन्हें स्वस्वंय सृजनकर्ता भगवान् ने एक किया है
  • इंसान से प्रेम ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।
  • अच्छे कर्मों से ही आप ईश्वर को पा सकते हैं। अच्छे कर्म करने वालों की ही ईश्वर मदद करता है।
  • जो कोई भी मुझे भगवान कहे, वो नरक में चला जाए।
  • सबसे महान सुख और स्थायी शांति तब प्राप्त होती है जब कोई अपने भीतर से स्वार्थ को समाप्त कर देता है।
  • दिन-रात, हमेशा ईश्वर का ध्यान करो।
  • आपने ब्रह्माण्ड की रचना की, आप ही सुख-दुःख के दाता हैं।
  • आप स्वयं ही स्वयं हैं, अपने स्वयं ही सृष्टि का सृजन किया है।
  • सत्कर्म कर्म के द्वारा, तुम्हे सच्चा गुरु मिलेगा, और उसके बाद प्रिय भगवान मिलेंगे, उनकी मधुर इच्छा से, तुम्हे उनकी दया का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
  • सच्चे गुरु की सेवा करते हए स्थायी शांति प्राप्त होगी, जन्म और मृत्यु के कष्ट मिट जायेंगे।
  • अज्ञानी व्यक्ति पूरी तरह से अंधा है, वह मूल्यवान चीजों की कद्र नहीं करता है।
  • ईश्वर स्वयं क्षमा करता है।
  • बिना गुरु के किसी को भगवान का नाम नहीं मिला है।
  • हर कोई उस सच्चे गुरु की जयजयकार और प्रशंसा करे जो हमें भगवान की भक्ति के खजाने तक ले गया है।
  • भगवान के नाम के अलावा कोई मित्र नहीं है, भगवान के विनम्र सेवक इसी का चिंतन करते और इसी को देखते हैं।
  • बिना नाम के कोई शांति नहीं है।
  • मृत्यु के शहर में, उन्हें बाँध कर पीटा जाता है, और कोई उनकी प्रार्थना नहीं सुनता है।
  • जो लोग भगवान के नाम पर ध्यान करते हैं, वे सभी शांति और सुख प्राप्त करते हैं।
  • मेरी बात सुनो जो लोग दुसरे से प्रेम करते है वही लोग प्रभु को महसूस कर सकते है।
  • अज्ञानी व्यक्ति पूरी तरह से अँधा होता है वह गहना के मूल्य की सराहना नही करता है बल्कि उसके चकाचौंध की तारीफ करता है।
  • मैं लोगो को के पैरो में गिरता हु जो लोग सच्चाई पर विश्वास रखते है।
  • सचमुच वे गुरु धन्य है जिन्होंने भगवान के नाम को याद करना सिखाया।
  • स्वार्थ ही बुरे कर्मो के जन्म का कारण बनता है।
  • जो लोग हर हाल में ईश्वर का नाम स्मरण करते है वे ही लोग सुख और शांति प्राप्त करते है।
  • जो ईश्वर में विश्वास रखता है उनके संरक्षण में, जरूरत में, जीवन के हर पथ पर ईश्वर उनका साथ देते है।
  • वह व्यक्ति हमेसा खुद अकेला पाता है जो लोगो के लिए जुबान पर कुछ और दिल में कुछ और ही रखता है।
  • जो लोग सच्चाई के मार्ग का अनुसरण करते है और लोगो के प्रति दया का भाव रखते है ऐसे लोगो के प्रति ही लोग करुणा और प्रेम का भाव रखते है।
  • परमपिता परमेश्वर के नाम के अलावा कोई भी आपका मित्र नही है ईश्वर के सेवक इसी का चिंतन करते है और ईश्वर को ही देखते है।
  • यदि तुम असहाय और कमजोरो पर तलवार उठाते हो तो एक दिन ईश्वर भी आपके ऊपर अपना तलवार चलायेंगा।
  • जब आप अपने अन्दर बैठे अहंकार को मिटा देंगे तभी आपको वास्तविक शांति की प्राप्त होगी।
  • अपने द्वारा किये गए अच्छे कर्मों से ही आप ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं। और अच्छे कर्म करने वालों की ईश्वर सदैव सहायता करता है।
  • इंसान को सबसे वैभवशाली सुख और स्थायी शांति तब ही प्राप्त होती है, जब कोई अपने भीतर बैठे स्वार्थ को पूरी तरह से समाप्त कर देता है।
  • इन्सान का स्वार्थ ही, अनेक अशुभ विचारों को जन्म देता है।
  • जो व्यक्ति दिन और रात परमत्मा का ध्यान करता है, उसके लिए मै खुद को बलिदान करता हूँ।
  • गुरुबानी को आप पूरी तरह से कंठस्थ कर लें।
  • अपने काम को लेकर लापरवाह ना बने में खूब मेहनत करें।
  • आप अपनी जवानी, जाति और कुल धर्म को लेकर कभी भी घमंडी ना बने उससे हमेशा बचे।
  • मैं उस गुरु के लिए न्योछावर हूँ, जो भगवान के उपदेशों का पाठ करता है।
  • स्वार्थ ही अशुभ संकल्पों को जन्म देता है।
  • हमे सबसे महान सुख और स्थायी शांति तभी प्राप्त हो सकती है जब हम अपने भीतर से स्वार्थ को समाप्त कर देते है।
  • किसी की भी इंसान की चुगली-निंदा ना करे उससे बचे, और किसी भी इंसान से ईर्ष्या करने के बजाय अपने कार्यो पर ध्यान दे।
  • विदेशी नागरिक, दुखी व्यक्ति, विकलांग व जरूरतमंद इंसान की सदैव हृदय से मदद करें।
  • शरीर को नुक्सान पहुंचने वाले किसी भी प्रकार के नशे और तंबाकू आदि का सेवन न करें।
  • सत्कर्म कर्म के द्वारा, तुम्हे सच्चा गुरु मिलेगा, और उसके बाद परमपिता परमेश्वर मिलेंगे, उनकी इच्छा से, तुम्हे उनकी दया का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
  • ये मित्र संगठित हैं, और फिर से अलग नहीं होंगे, उन्हें स्वंय सृजनकर्ता भगवान् ने एक किया है।
  • जब आप अपने अन्दर से अहंकार मिटा देंगे तभी आपको वास्तविक शांति प्राप्त होगी।
  • हमें उन सभी अनुष्ठानों को और उन विचारो को ह्रदय से हटा देना चाहिए, जो हमें प्रभु की भक्ति से दूर ले जाती हो।
  • आप अपनी जीविका को चलाने के लिए ईमानदारी पूर्वक काम करे।
  • हमेशा आप अपनी कमाई का दसवां भाग दान में दे दें।
  • सेवक नानक भगवान के दास हैं, अपनी कृपा से, भगवान उनका सम्मान सुरक्षित रखते हैं।
  • हमेशा अपने दुश्मन से लड़ने से पहले, साम, दाम, दंड और भेद का सहारा लें, और अंत में ही आमने-सामने के युद्ध में पड़ें।