मुनव्वर राणा

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मुनव्वर राणा एक मशहूर भारतीय उर्दू कवि व शायर हैं । उन्होंने उर्दू ग़ज़लों में हिन्दी और मागधी शब्दों का प्रयोग करके ग़ज़ल को आम जनता तक पहुँचाया है। उर्दू ग़ज़ल के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । परन्तु समाज में बढ़ती हुई धर्म संबंधी हिंसा और जातिवाद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हुए उन्होंने पुरस्कार लौटा दिया ।

उद्धरण[सम्पादन]

  • अगर आप वाल्मीकि के बारे में बात करेंगे तो आपको उनके अतीत के बारे में भी बात करनी होगी । वाल्मीकि सिर्फ़ एक लेखक ही थे, और आप लोगों ने उन्हें भगवान बना दिया ।
  • ओवैसी और भारतीय जनता पार्टी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं । आपस में लड़ने का नाटक और झूठे दिखावा कर लोगों को उल्लू बना रहे हैं । हक़ीक़त यह है कि दोनों ही वोट राजनीति के लिए समाज में दंगा फ़साद फैलाते हैं जिससे ज़्यादा फ़ायदा भाजपा को मिलता है ।
  • अगर योगी दुबारा मुख्यमंत्री बनते हैं तो मैं समझ लुंगी कि उत्तर प्रदेश और रहने लायक़ नहीं रहा। मैं और कहीं चला जाऊँगा ।
  • जिस तरह मुस्लिम बच्चों को झूठे मुक़दमे में फँसाया जा रहा है, इससे उन्हें आल क़ायदा में घुसने के लिए मजबूर किया जा रहा है । कल शायद मुझे भी पुलिस उठा लेगी क्यूं कि मैं अक्सर शायरी के लिए पाकिस्तान जाता रहता हूँ ।
    • मुस्लिम उग्रवादियों पर मंतव्य [४]
  • मुस्लिम के आठ बच्चे इसलिए हैं कि अगर दो बच्चों को पुलिस पकड़ लिया और दो बच्चे करोना में मर गए, तो बाक़ी चार बच्चे घर सँभाल लेंगे और अपनी माता-पिता की अंत्येष्टि भी कर लेंगे ।
    • मुस्लिम आबादी पर मंतव्य [५]

संदर्भ[सम्पादन]

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श्रेणी:१९५२ में जन्म