सोना

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  • सर्वे गुणाः काञ्चनमाश्रयन्ते । (सभी गुणों का आश्रय सोना है।) -- भर्तृहरि
  • सोना, सज्जन, साधु जन, टूट जुड़ै सौ बार।
दुर्जन कुम्भ कुम्हार के, एके धका दरार ॥ -- कबीरदास
  • पैसा सोना है, और कुछ नहीं। -- जे पी मार्गन, १९१२ में
  • स्वर्णिम नियम याद रखो-
जिसके पास स्वर्ण है, वही नियम बनाता है। -- Brant Parker और Johnny Har