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सून जू

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सून जू(Sun Tzu (孫子 Sūn Zǐ ; अंग्रेजी : Sun Tzu) चीन के एक दार्शनिक, सैन्य रणनीतिकार और सेनानायक थे। उनका जन्म प्राचीन चीन में ६वीं शताब्दी इसापूर्व हुआ था। चीनी भाषा में 'युद्ध की कला' नामक ग्रन्थ उनकी ही रचना माना जाता है।

उक्तियाँ[सम्पादन]

  • सब लोग उन युक्तियों को देख सकते हैं जिनसे मैं विजय प्राप्त करता हूँ, लेकिन उन रणनीतियों को कोई नहीं देख सकता जिनसे विजय प्राप्त होती है।
  • सभी युद्ध धोखे पर आधारित है.
  • निराकरता की सीमा तक सूक्ष्म रहो, अत्यंत रहस्यमय रहो, तभी तुम प्रतिद्वंद्वी के भाग्य का निदेशक हो सकते हो।
  • सौ लड़ाई में सौ जीत जीतने के लिए कौशल की परिपूर्णता नहीं है. बिना लादे दुश्मन को वश में करना कौशल की परिपूर्णता है.
  • वे जो जानते हैं की वो कब लड़ सकते हैं और कब नहीं , विजयी होंगे।
  • अगर आप शत्रु से दूर हैं तो उन्हें विश्वास दिलाईये की आप निकट हैं।
  • अगर आप शत्रु को जानते हैं और स्वयं को जानते हैं तो आपको सौ युद्धों के परिणामो से भी डरने की जरुरत नहीं है।
  • अपराजेयता रक्षा में निहित होती है, जीत की संभावना आक्रमण में होती है।.
  • युद्ध की व्यावहारिक कला में सबसे अच्छी बात ये है शत्रु राष्ट्र को सम्पूर्ण रूप से हासिल करना, उसे विखंडित एवं नष्ट करना अच्छी बात नहीं है।
  • केवल प्रबुद्ध शासक और बुद्धिमान सेना नायक ही सर्वोच्च प्रतिभा का उपयोग खुफिया तंत्र के लिए करते हैं, और परिणाम स्वरूप महान नतीजे प्राप्त करते हैं।
  • अपने सैनिकों को अपने बच्चों जैसा अपनाएं, वे आपका कठिन परिस्थितियों में भी साथ देंगे; उनकी तरफ आपने पुत्रो की तरह देखें और वे आपका म्रत्यु तक भी साथ देंगे।
  • गुप्त परिचालन युद्ध में आवश्यक हैं, उन पर सेना के लिए अपनी हर चाल चलना निर्भर करता है।
  • प्रबुद्ध शासक हमेशा चौकन्ना रहता है, और अच्छा सेना नायक पूर्णतः सतर्क।.
  • एक सेना नायक जो बिना डर और अपमान के आगे बढ़ता है, जिसकी कोच सिर्फ अपने राष्ट्र की रक्षा करनी है, किसी भी राज्य के लिए बहुमूल्य है।
  • हार से खुद को सुरक्षित करने का अवसर हमारे ही हाथों में निहित है, लेकिन दुश्मन को हराने के अवसर दुश्मन खुद द्वारा प्रदान की जाती है।
  • युद्ध की सर्वोच्च कला दुश्मन से बिना लड़े ही उसे अपने वश में करना है।
  • आज तक ऐसी कोई भी लम्बी लडाई नहीं हुयी है जिससे कोई देश लाभान्वित हुआ है।
  • युद्ध में लड़ना और विजय प्राप्त करना सर्वोच्च उत्कृष्टता नहीं है, सर्वोच्च उत्कृष्टता बिना लड़े दुश्मन के प्रतिरोध को तोड़ने में हैं.
  • विजयी योद्धा पहले विजय प्राप्त करते हैं और फिर युद्ध के लिए जाते हैं जबकि पराजित योद्धा युद्ध करने जाते हैं फिर जीत की तलाश करते हैं।

इन्हें भी देखें[सम्पादन]