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सदाचार

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सदाचार (सद् + आचार) का अर्थ है, अच्छा आचरण । कदाचार, दुराचार, अत्याचार आदि इसके विलोम शब्द हैं।

उक्तियाँ

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  • “हे तात्! ब्राह्मणत्व का कारण न तो स्वाध्याय है और न ही शास्त्र श्रवण। ब्राह्मणत्व का हेतु मात्र सदाचार है, इसमें कोई संशय नहीं है।” -- महाभारत में युधिष्ठिर, यक्ष से
  • नावृतो दुश्चारितान् -- उपनिषद्
ज्ञान आचरणहीन व्यक्ति का वरण नहीं करता।
  • आचारहीनं न पुनन्ति वेदाः
आचारहीन का उद्धार वेद भी नहीं कर सकते।
  • सदाचार की रक्षा सबसे पहले करनी चाहिए क्योकि धन तो आता-जाता रहता है। उसके न रहने पर सदाचारी कमजोर नहीं माना जाता, किन्तु जिसने सदाचार त्याग दिया, वह तो नष्ट ही होना है। -- विदुर नीति
दुराचार
अग्निदो गरदश्चैव शस्त्रपाणिर्धनापहः।
क्षेत्रदारापहर्ता च षडेते ह्याततायिनः॥ -- वसिष्ठस्मृति
आग लगाने वाला (अग्निद), विषप्रयोग करने वाला (गरद), हाथ में शस्त्र धारण किया हुआ व्यक्ति (शस्त्रपाणि), धन लूटने वाला (धनापह), दूसरे की भूमि हड़पने वाला (क्षेत्र-अपहर्ता) तथा परस्त्री का अपहरण करने वाला (दारा-अपहर्ता) - ये छः आततायी हैं।

इन्हें भी देखें

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