व्लादिमीर लेनिन
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व्लादिमीर लेनिन 20वीं सदी के एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपनी गहन विचारों और परिवर्तनकारी नेतृत्व के माध्यम से न केवल रूस के राजनीतिक परिदृश्य में, बल्कि वैश्विक इतिहास में भी क्रांति ला दी। बोल्शेविक क्रांति के शिल्पी के रूप में, व्लादिमीर लेनिन के विचार और लेखन आज भी गूंजते रहते हैं, और सत्ता, शासन और सामाजिक न्याय की गतिशीलता की जाँच करने का एक माध्यम प्रदान करते हैं। उनके विचार क्रांतिकारी भावना के उत्साह, समाजवादी सिद्धांत की जटिलताओं और राजनीतिक सत्ता की चुनौतियों को समेटे हुए हैं।
विचार
[सम्पादित करें]- क्रांति आम जनता और व्यक्ति से शक्ति के संचय तथा संधान की मांग करती है।
- लोकतंत्र समाजवाद के लिए अपरिहार्य है।
- ज्ञान शक्ति है, लेकिन संगठन उससे बड़ी शक्ति।
- राजनीति का आधार वर्ग संघर्ष है।
- ऐसे दशक होते हैं जब कुछ नहीं होता और ऐसे सप्ताह होते हैं, जब दशक भर की घटनाएँ हो जाती हैं।
- क्रांतिकारी परिस्थिति के बिना क्रांति असंभव है।
- कभी-कभी इतिहास को धक्का देने की जरूरत होती है।
- क्रांतिकारी संकट के बिना क्रांति असंभव है।
- समाजवाद का लक्ष्य साम्यवाद है।
- हर क्रांति अंतत: वाष्प बन जाती है और पीछे केवल नौकरशाही की गंदगी छोड़ जाती है।
- क्रांतिकारी सिद्धांत के बिना कोई क्रांतिकारी आंदोलन नहीं हो सकता।
- गंभीर क्रांतिकारी परिस्थिति में आधे-अधूरे उपाय घातक होते हैं।
- दमन किए गए लोग हर कुछ वर्षों में केवल यह तय करने की अनुमति पाते हैं कि शोषक वर्ग का कौन सा प्रतिनिधि उन्हें शोषित और दमन करेगा।
- एक बंदूक वाला आदमी सौ बिना बंदूक वालों को नियंत्रित कर सकता है।
- राज्य वर्गीय शासन का एक उपकरण है, एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग का दमन करने का साधन।
- पूँजीवादी समाज में लोकतंत्र एक नगण्य अल्पसंख्यक के लिए होता है, अमीरों के लिए लोकतंत्र।
- पूँजीवादी समाज में स्वतंत्रता वैसी ही रहती है जैसी प्राचीन यूनानी गणराज्यों में थी, दास मालिकों के लिए स्वतंत्रता।
- पूँजीपति आत्म-त्याग करने में उतने ही सक्षम हैं, जितना कोई व्यक्ति अपने जूतों की लेस पकड़कर खुद को ऊपर खींचने में।
- मजदूर वर्ग स्वभावत: और सहज ही समाजवादी है।
- साम्राज्यवाद पूँजीवाद का सर्वोच्च चरण है।
- पूँजीवाद एक अंतहीन भय है।
- बुर्जुआ वर्ग को कुचलने का तरीका यह है कि उन्हें कर और मुद्रास्फीति की चक्की में पीसा जाए।
- दमन किए गए लोग केवल कुछ वर्षों में यह तय करने की अनुमति पाते हैं कि शोषक वर्ग का कौन प्रतिनिधि उन्हें शोषित करेगा।
- पूँजीपति हमें वही रस्सी बेचेंगे, जिससे हम उन्हें फाँसी देंगे।
- भरोसा अच्छा है, पर नियंत्रण बेहतर है।
- पूँजीवादी व्यवस्था को नष्ट करने का सबसे अच्छा तरीका मुद्रा को भ्रष्ट करना है।
- राजनीति में नैतिकता नहीं होती, वहाँ केवल उपयोगिता होती है।
- कभी-कभी आपको छल, चाल, चालाकी, गैरकानूनी उपाय, छिपाव और धोखे का इस्तेमाल करना पड़ता है।
- हमें सपने देखने चाहिए, लेकिन हमारे सपने वास्तविकता से जुड़े होने चाहिए।
- कभी-कभी एक कदम पीछे हटकर, आप दो कदम आगे बढ़ सकते हैं।
- दो कदम आगे बढ़ने के लिए कभी-कभी एक कदम पीछे हटना जरूरी होता है।
- संघर्ष का उद्देश्य केवल दुनिया की व्याख्या करना नहीं, बल्कि उसे बदलना है।
- मुझे बच्चों को सिखाने के लिए चार साल दीजिए और मैंने जो बीज बोया होगा, वह कभी उखाड़ा नहीं जा सकेगा।
- प्रेस केवल सामूहिक प्रचारक और सामूहिक आंदोलनकारी ही नहीं, बल्कि सामूहिक आयोजक भी होना चाहिए।
- क्रांतिकारी सिद्धांत के बिना कोई क्रांतिकारी आंदोलन नहीं हो सकता।
- पढ़ो, पढ़ो, पढ़ो।
- सीखना कभी बिना गलतियों और हार के पूरा नहीं होता।
- स्वतंत्रता इतनी कीमती है कि इसे राशन करना पड़ता है।
- राजनीति में केवल विश्वास, समर्पण और आध्यात्मिक गुणों पर भरोसा करना, इसे गंभीरता से नहीं लिया जा सकता।
- कोई भी रसोइया देश चला सके, ऐसा होना चाहिए।
- मजदूर जनता खुद से स्वतंत्र विचारधारा विकसित नहीं कर सकती।
- यह सच है कि स्वतंत्रता मूल्यवान है, इतनी मूल्यवान कि इसे सावधानीपूर्वक राशन करना पड़ता है।
- सत्य तक पहुँचने का रास्ता विचार के श्रम से होकर जाता है।
- जो काम नहीं करता, उसे खाने का अधिकार नहीं है।
- निश्चित रूप से समाजवाद विजयी होगा, लेकिन वह अपने आप नहीं आएगा।
- जब तक वर्ग समाप्त नहीं होंगे, युद्ध समाप्त नहीं हो सकता।
- युद्ध राजनीति की निरंतरता है, केवल अन्य साधनों से।
- हिंसा से थोपे गए शांति को निष्क्रिय रूप से स्वीकार करना क्रांति से विश्वासघात है।
- हमारे कार्यक्रम में नास्तिकता का प्रचार अनिवार्य रूप से शामिल है।
- धर्म जनता के लिए अफीम है।
- हर समाज अराजकता से केवल तीन भोजन दूर है।
- जब तक शोषित लोग स्वतंत्र नहीं होते, तब तक कोई वास्तविक और पूर्ण स्वतंत्रता नहीं हो सकती।
- केवल शस्त्रधारी जनता ही स्वतंत्रता की वास्तविक गारंटी है।
- सर्वहारा वर्ग के पास खोने के लिए कुछ नहीं है सिवाय अपनी जंजीरों के।