भाग्य

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  • मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं ही निर्माता है। -- स्वामी रामतीर्थ
  • भाग्य पर वह भरोसा करता है, जिसमें पौरुष नहीं होता। -- प्रेमचंद
  • विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है। -- नेपोलियन हिल
  • भाग्य के भरोसे बैठे रहने पर भाग्य सोया रहता है, और साहसपूर्वक खड़े होने पर भाग्य भी उठ खड़ा होता है।
  • ईश्वर या प्रारब्ध या भाग्य को कोसने से कोई लाभ नहीं क्योंकि अपने को अपमान और लांछना की स्थिति में ला पटकने की सारी जिम्मेदारी हमारी है। -- सुभाषित
  • मृत अतीत को दफना दो, अनंत भविष्य तुम्हारे सामने है और स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कर्म तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है। -- विवेकानन्द
  • जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है। ईश्वर के पास हमेशा एक बेहतर योजना होती है। -- अज्ञात
  • अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है॥ -- रामधारी सिंह 'दिनकर'
  • अपने पुरुषार्थ से अर्जित ऐश्वर्य का ही दूसरा नाम सौभाग्य है। -- अज्ञात
  • भाग्य साहसी मनुष्य की सहायता करता है। -- वर्जिल
  • प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य एक बार अवश्य उदय होता है। यह बात अलग है कि वह उसका कितना लाभ उठाता है। -- भृगु
  • भाग्यचक्र लगातार घूमा करता है, कौन कह सकता है कि आज मैं उच्च शिखर पर पहुँच जाऊंगा। -- कन्फ्यूशस
  • सौभाग्य दरवाजा खटखटाता है और पूछता है - "क्या समझदारी घर में मौजूद है ?"
  • आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य है। -- पाल शिरट