ध्वज
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- विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा ॥ -- श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
- सौरज धीरज तेहि रथ चाका, सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका। -- रामचरितमानस
इन्हें भी देखें
[सम्पादित करें]तिरंगा भारत का राष्ट्रीय ध्वज है। इसमें तीन क्षैतिज पट्टियाँ हैं – केसरिया (त्याग और शौर्य), श्वेत (शांति और सच्चाई), और हरा (समृद्धि)। इसके बीच में 24 आरे वाला अशोक चक्र है, जो धर्म और गति का प्रतीक है। यह ध्वज भारत की आज़ादी, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
प्रेरक उद्धरण
[सम्पादित करें]- "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा।" — श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
- यह पंक्ति भारत के प्रसिद्ध राष्ट्रीय गीत से है, जो स्वतंत्रता संग्राम की भावना को प्रकट करती है।
- "तिरंगे का हर रंग सिर्फ रंग नहीं, भारत के संस्कारों की आत्मा है।" — अज्ञात
- "तिरंगा हमारी पहचान ही नहीं, हमारी आत्मा का गौरव है।" — अज्ञात
श्लोक और काव्य
[सम्पादित करें]- "सौरज धीरज तेहि रथ चाका, सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।" — *रामचरितमानस*, युद्धकाण्ड
- (शौर्य और धैर्य उसके रथ के चक्र हैं, सत्य और शील उसकी ध्वजा व पताका हैं।)
- यह श्लोक ध्वजा को नीति व आदर्श का प्रतीक बनाता है।
ध्वज के रंगों का अर्थ
[सम्पादित करें]- केसरी – शौर्य, त्याग और बलिदान
- श्वेत – शांति, सत्य और ईमानदारी
- हरा – हरितिमा, जीवन और समृद्धि
- अशोक चक्र – धर्म, गति और प्रगति का प्रतीक
तिरंगे से जुड़ी जानकारी
[सम्पादित करें]- भारतीय ध्वज को संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को अपनाया।
- इसका डिज़ाइन आंध्र प्रदेश के पिंगली वेंकैया ने तैयार किया था।
- इसे 'राष्ट्रीय गौरव' के रूप में सम्मानित किया जाता है, और इसका अपमान दंडनीय अपराध है।