उपाय

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  • उपायं चिन्तयन् प्राज्ञो ह्यपायमपि चिन्तयेत् ।
पश्यतो बकमूर्खस्य नकुलैर्भक्षिता प्रजाः ॥ -- पञ्चतन्त्र
बुद्धिमान व्यक्ति जब कोई उपाय सोचे तो उसके साथ ही अपाय (उपाय के सम्भावित दुष्परिणाम) बारे में भी सोचना चाहिये। देखो कैसे मूर्ख बकुले के बच्चों को नेवले ने खा लिया।
  • उपायेन हि यच्छक्यं न तच्छक्यं पराक्रमैः ॥ -- हितोपदेश / माघ
जो काम उपाय से किया जा सकता है, वह पराक्रम से नहीं किया जा सकता।
  • उपायेन जयो यदृग्रिपोस्तादृड्डं न हेतिभिः ॥
उपाय से शत्रु को जीतो, हथियार से नहीं।
  • उपायतः समारम्भाः सर्व्वे सिद्ध्यन्त्युपक्रमाः।
उपायं पश्य येन त्वं धारयेथाः प्रजा नृप ॥ -- वह्निपुराण ; हरिवंश पृथूपाख्यान
उपाय से आरम्भ किये गये सभी उपक्रम सिद्ध होते हैं। इसलिये हे राजन्, ऐसा उपाय देखिये जिससे आप इस प्रजा पर शासन कर सकें।
  • सर्व्वोपायैस्तथा कुर्य्यात् नीतिज्ञः पृथिवीपतिः ॥ -- मनु
  • चतुर्थोपायसाध्ये तु रिपौ सान्त्वमपक्रिया।
  • साम दानञ्च भेदश्च दण्डश्चेति चतुष्टयम् ।
मायोपेक्षेन्द्रजालञ्च सप्तोपायाः प्रकीर्त्तिताः ॥ -- कामन्दकीय नीतिसार
साम, दान, भेद और दण्ड - इन चार का समूह तथा माया, उपेक्षा और इन्द्रजाल, ये सात उपाय प्रसिद्ध हैं।
  • धर्म्मेण व्यवहारेण छलेनाचरितेन च ।
प्रयुक्तं साधयेदर्थं पञ्चमेन बलेन च ॥ -- मनु
  • तत्त्वज्ञः सर्वभूतानांयोगज्ञः सर्वकर्मणाम्।
उपायज्ञोमनुष्याणां नरः पण्डित उच्यते॥ -- महाभारत (विदुरनीति)
जो सम्पूर्ण भौतिक पदार्थों की वास्तविकता का ज्ञान रखनेवाला, सब कार्यों के करने का ढंग जानने वाला तथा मनुष्यों में सबसे बढ़कर उपाय का जानकार है, वह मनुष्य पण्डित कहलाता है।

इन्हें भी देखें[सम्पादन]