सामग्री पर जाएँ

अन्तर्दृष्टि

विकिसूक्ति से
  • यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम् ।
लोचनाभ्यां विहीनस्य दर्पणः किं करिष्यति ॥ -- चाणक्य
जिसके पास अपनी बुद्धि नहीं हो तो शास्त्र उसका क्या कल्याण कर सकता है? कुछ नहीं । नेत्रहीन व्यक्ति को दर्पण से कोई लाभ नहीं प्राप्त हो सकता ।
  • सबसे अच्छी दृष्टि, अंतर्दृष्टि है। -- Jonathan Swift

इन्हें भी देखें[सम्पादन]