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स्नान

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स्नान का अर्थ है नहाना। सनातन धर्म में स्नान का बड़ा महत्व है। पुराणों में छः प्रकार के स्नानों का विधान किया गया है। वे नित्य स्नान (दैनिक स्नान), नैमित्तिक स्नान (आकस्मिक स्नान), काम्य स्नान (वांछनीय), क्रिया स्नान (औपचारिक), क्रियांग स्नान (केवल संस्कार के लिए उपयोग किए जाने वाले अंगों को स्नान करना) और मलकर्ण स्नान (मल को बाहर निकालने के लिए स्नान) हैं। (अग्नि पुराण, अध्याय 155)

उक्तियाँ

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  • स्नानमूलाः क्रियाः सर्वाः श्रुतिस्मृत्युदिता नृणाम्। तस्मात् स्नानं निषेवेत श्रीपुष्ट्यारोग्यवर्धनम्॥
समस्त क्रियाओं का मूल स्नान है । श्री पुष्टि एवं आरोग्यकी वृद्धि चाहनेवाले मनुष्यको स्नान सदैव करना चाहिये।
  • नित्यं स्नात्वा शुचिः कुर्याद्देवर्षिपितृतर्पणम्। -- मनु[]
प्रतिदिन प्रात स्नान करके पवित्र होकर सन्ध्यावन्दन तथा देवपितृ तर्पणादि नित्य कर्म करें।
  • गुणा दश स्नानकृतो हि पुंसो रूपं च तेजश्च बलं च शौचम्। -- विश्वामित्र स्मृति १।८६
स्नानसे मात्र शुद्धि ही नहीं, अपितु रूप, तेज, शौर्य आदिकी भी वृद्धि होती है।
  • स्नानेन सत्यमाप्नोति स्नानं धर्मः सनातनः ।
धर्मान्मोक्षफलं प्राप्य पुनर्नैवावसीदति ॥ -- स्कन्दपुराण, ब्राह्मखण्ड
स्नान से मनुष्य सत्य को पाता है । स्नान सनातन धर्म है, धर्म से मोक्षरूप फल पाकर मनुष्य फिर दुःखी नहीं होता ।
  • गङ्गे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥
गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु, कावेरी नदियों ! मेरे स्नान करने के is जल में पधारिये। अर्थात जिस जल से मैं स्नान कर रहा हूँ, उस जल में अपनी असीम कृपा करें।
  • स्‍नानदानतपोऽवस्थावीर्यसंस्कारकर्मभि: ।
मत्स्मृत्या चात्मन: शौचं शुद्ध: कर्माचरेद्‌द्विज: ॥ -- श्रीमद्भागवत 11.21.14
स्नान, दान, तप, आयु, निजी बल (सामर्थ्य), संस्कार, नियत कर्म तथा इन सबसे ऊपर मेरे स्मरण द्वारा आत्म-शुद्धि की जा सकती है। ब्राह्मण तथा अन्य द्विजातियों को अपना अपना विहित कर्म करने के पूर्व ठीक से शुद्ध हो लेना चाहिए।
  • तैलाभ्यङ्गे चिताधूमे मैथुने क्षौरकर्मणि।
तावद् भवति चाण्डालो यावत् स्नानं न चाचरेत्॥ -- चाणक्य
तेल से मालिश करने के बाद, दाह संस्कार से वापसी के बाद, मैथुन करने के बाद, और बाल कटवाने के बाद मनुष्य तब तक चाण्डाल बना रहता है जब तक स्नान न कर ले।
  • गुणा दश स्नान परस्य साधो रूपञ्च तेजश्च बलं च शौचम्।
आयुष्यमारोग्यमलोलुपत्वं दु:स्वप्रनाशश्च यशश्च मेधा:॥
जो लोग सुबह उठकर जल्दी नहाते हैं वे सदैव सुंदर बने रहते हैं और लंबे समय तक जवान नजर आते हैं। जल्दी स्नान करने से व्यक्ति के तेज में वृद्धि होती है। त्वचा का आकर्षण बढ़ जाता है। सुबह स्नान करने से शरीर मजबूत बनता है। कई मौसमी बीमारियों से बचाव होता है।
  • केयूराणि न भूषयन्ति पुरुषं हारा न चन्द्रोज्ज्वलाः
न स्नानं न विलेपनं न कुसुमं नालङ्कृता मूर्धजाः।
वाण्येका समलङ्करोति पुरुषं या संस्कृता धार्यते
क्षीयन्ते खलु भूषणानि सततं वाग्भूषणं भूषणम्॥ -- भर्तृहरि, नीतिशतक
इस धरती पर पुरुषों (मनुष्यों) की सुन्दरता न तो बाजूबन्द पहनने से और न ही चन्द्रमा के समान उज्ज्वल कांति वाले मोतियों की माला ही पहनने से बढ़ती है। न स्नान से, न सुगंधित पदार्थों के लेपन से, न फूलों की सज्जा से, न ही बालों को बनाने से ही (मनुष्य की सुन्दरता में वृद्धि होती है)। एकमात्र संस्कारित वाणी अपनाने से ही मनुष्य के सौन्दर्य को बढ़ाती है। सभी प्रकार के आभूषण समयान्तराल के बाद नष्ट ही हो जाते हैं, किन्तु मधुर/सारगर्भित/कल्याणकारी वाणी ही सदैव मनुष्य का आभूषण होती है।


  • गंगा तव दर्शनात् पुण्यम्, स्नानात् पतकनाशनम्।
दृष्ट्वा पुण्या भवेत् धात्रिः, स्पृष्ट्वा पापं विनश्यति॥
हे गंगा! आपके दर्शन मात्र से पुण्य प्राप्त होता है, आपके जल में स्नान करने से पापों का नाश होता है।
  • कुरुक्षेत्र में स्नान करने से समफल, काशी में स्नान करने से दस गुना फल, प्रयाग त्रिवेणी में 100 गुणा फल और गंगासागर स्नान करना 1000 गुणा फलदायी है। लेकिन शूकर क्षेत्र में गंगा स्नान करने से अनन्त फल मिलता है।
  • तीरथ कोट्टा की ऐसानन दी बहू दान महा बरता धरे ॥
देसा फिरिओ कर भेसा तपोधन केसा धरे न मिले हरि प्यारे॥
आसन कोटि करे असट्टांग धरे बहू नियासा करे मुख करे ॥
दीना दइयाला अकाल भजे बिनु आंता को अंत के धाम सिद्धारे॥ -- दशम ग्रन्थ साहिब 10॥252॥
हे प्यारे ! करोड़ों तीर्थों में स्नान करने से, दान-दक्षिणा देकर और महान व्रत करने से, अनेक देशों में तपस्वी के वेश में विचरने और जटा धारण करने से प्रभु का साक्षात्कार नहीं होता। करोड़ों आसन करके अष्टांग योग करने से, मंत्र पढ़ते-पढ़ते अंगों को छूने और चेहरे को काला करने से भी प्रभु का दर्शन नहीं होता। लेकिन दीन-दुखियों के अलौकिक और दयालु भगवान के स्मरण के बिना अंततः यम के निवास में जाएगा।

इन्हें भी देखें

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