विलियम शेक्सपीयर

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विलियम शेक्सपीयर
  • मूर्ख खुद को बुद्धिमान समझता है, लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति खुद को मूर्ख समझता है।
  • जैसे शरारती बच्चों के लिए मक्खियाँ होती हैं, वैसे ही देवताओं के लिए हम होते हैं; वो अपने मनोरंजन के लिए हमें मारते हैं।
  • एक मिनट देर से आने से अछ्छा है तीन घंटे पहले आएं।
  • डरपोक अपनी मृत्यु से पहले कई बार मरते हैं; बहादुर मौत का स्वाद और कभी नहीं बस एक बार चखते हैं।
  • अच्छाई की प्रचुरता बुराई में बदल जाती है।
  • लेकिन आदमी आदमी होता है; जो सबसे अच्छे होते हैं वो कई बार ये भूल जाते हैं।
  • ये दुनिया एक रंगमंच है और सभी स्त्री और पुरुष केवल अदाकार; सबके प्रवेश और निकास का समय भी तय है; और एक व्यक्ति अपने समय अंतराल में अनेक किरदार निभाता है। ये किरदार ७ चरणों में निभाया जाता है।
  • नरक रिक्त है और सारे राक्षस यहीं हैं।
  • अच्छाई की प्रचुरता बुराई में बदल जाती है।
  • महानता से घबराइये नहीं; कुछ लोग महान पैदा होते हैं, कुछ महानता हासिल करते हैं और कुछ लोगों के ऊपर महानता थोप दी जाती है।
  • हम जानते हैं कि हम क्या हैं, पर हम यह नहीं जानते की हम क्या हो सकते हैं।
  • नाम में क्या रखा है? अगर हम गुलाब को कुछ और कहें तो भी उसकी सुगंध उतनी ही मधुर होगी।

कविता[सम्पादन]

बाहरी कडियाँ[सम्पादन]