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विरोधाभास

विकिसूक्ति से
  • विरोधाभास का होना झूठ का प्रतीक नहीं है, और ना ही इसका ना होना सत्य का। -- ब्लेज पास्कल
  • सिर राखे सिर जात है सिर काटै सिर होय।
जैसे बाती दीप की कटि उजियारा होय॥ -- कबीर
  • लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूरि।
चींटी ले सक्कर चली, हाथी के सिर धूरि॥ -- बिहारी
  • या अनुरागी चित्त की, गति समझै नहीं कोय।
ज्यों ज्यों बूडै स्याम रंग, त्यों त्यों उज्ज्वल होय॥ -- बिहारी
नुष्य के अनुरागी हृदय की वास्तविक गति और स्थिति को कोई भी नहीं समझ सकता है। जैसे-जैसे मन कृष्ण-भक्ति के रंग में डूबता जाता है, वैसे-वैसे वह अधिक उज्ज्वल होता जाता है।
  • नर की अरु नल-नीर की, गति एकै करि जोय।
जेतौ नीचो हवै चलै, तेतौ ऊँचौ होय॥ -- बिहारी
मनुष्य की और नल के जल की समान स्थिति होती है। जिस प्रकार नल का जल जितना नीचे होकर बहता है, उतना ही ऊँचा उठता है; उसी प्रकार मनुष्य जितना नम्रता का व्यवहार करता है उतना ही ऊँचा (बड़ा) बनेगा।
  • यह अंत की शुरुआत थी।
  • परिवर्तन ही एकमात्र स्थिरता है।
  • असफलता ही सफलता की कुंजी है।
  • पैसा कमाने के लिए पैसा खर्च करना पड़ता है।
  • वह हँसते-हँसते रो पड़ा।
  • अंधेरी रात में भी उम्मीद की किरण दिख रही थी।
  • मैं अकेला होकर भी सबके साथ हूँ।
  • उसका मौन भी बहुत कुछ कह गया।
  • मरकर भी वह अमर हो गया।