विरोधाभास
दिखावट
- विरोधाभास का होना झूठ का प्रतीक नहीं है, और ना ही इसका ना होना सत्य का। -- ब्लेज पास्कल
- सिर राखे सिर जात है सिर काटै सिर होय।
- जैसे बाती दीप की कटि उजियारा होय॥ -- कबीर
- लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूरि।
- चींटी ले सक्कर चली, हाथी के सिर धूरि॥ -- बिहारी
- या अनुरागी चित्त की, गति समझै नहीं कोय।
- ज्यों ज्यों बूडै स्याम रंग, त्यों त्यों उज्ज्वल होय॥ -- बिहारी
- नुष्य के अनुरागी हृदय की वास्तविक गति और स्थिति को कोई भी नहीं समझ सकता है। जैसे-जैसे मन कृष्ण-भक्ति के रंग में डूबता जाता है, वैसे-वैसे वह अधिक उज्ज्वल होता जाता है।
- नर की अरु नल-नीर की, गति एकै करि जोय।
- जेतौ नीचो हवै चलै, तेतौ ऊँचौ होय॥ -- बिहारी
- मनुष्य की और नल के जल की समान स्थिति होती है। जिस प्रकार नल का जल जितना नीचे होकर बहता है, उतना ही ऊँचा उठता है; उसी प्रकार मनुष्य जितना नम्रता का व्यवहार करता है उतना ही ऊँचा (बड़ा) बनेगा।
- यह अंत की शुरुआत थी।
- परिवर्तन ही एकमात्र स्थिरता है।
- असफलता ही सफलता की कुंजी है।
- पैसा कमाने के लिए पैसा खर्च करना पड़ता है।
- वह हँसते-हँसते रो पड़ा।
- अंधेरी रात में भी उम्मीद की किरण दिख रही थी।
- मैं अकेला होकर भी सबके साथ हूँ।
- उसका मौन भी बहुत कुछ कह गया।
- मरकर भी वह अमर हो गया।