लाला लाजपत राय

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लाला लाजपत राय भारतीय लेखक, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे।

विचार[सम्पादन]

  • सरकार ने जो अपनी ही मासूम विषयों पर हमला करता है एक सभ्य सरकार कहलाने का कोई दावा नहीं कर सकता है। अपने दिमाग में डाल लो कि ऐसी सरकार लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकती है। मैं घोषणा करता हूँ कि मुझ पर हमला भारत में ब्रिटिश शासन के ताबूत में आखिरी नाखून होगा। (20 अक्टूबर 1928 को लाहौर में एक बैठक के दौरान)
  • पराजय और असफलता कभी कभी विजय की ओर बढने के लिए जरुरी कदम होते है।
  • अगर सार्वजनिक जीवन में अनुशासन का होना बहुत जरुरी है वरना प्रगति के रास्ते में बाधा आ जाएगी।
  • देशभक्ति का निर्माण हमेसा न्याय और सत्य की दृढ़ चट्टान पर ही किया जा सकता है।
  • सिर्फ अतीत को देखकर उस पर गर्व करना तबतक व्यर्थ है जबतक उससे प्रेरणा न लेकर भविष्य का निर्माण नही किया जाय।
  • मनुष्य हमेसा प्रगति की मार्ग में अपने गुणों से आगे बढ़ता है किसी दुसरे के भरोसे रहकर आगे नही बढ़ा जा सकता है।
  • भले ही आजादी हमे प्यारी हो लेकिन इसके पाने का मार्ग बहुत ही लम्बा और कष्टकारी है।
  • परतन्त्रता में जीने से मतलब खुद का विनाश है।
  • कष्ट उठाना तो हमारी लक्षण है लेकिन सत्य की खातिर कष्टों से बचना कायरतापूर्ण है।
  • गलतियों को सुधारते हुए आगे बढना ही उन्नति कहलाता है।
  • पूरी निष्ठा और ईमानदारी से शांतिपूर्ण साधनों के जरिये उद्देश्य को पूरा करने को ही अहिंसा कहा जाता है।
  • दुसरों के ऊपर विश्वास रखने के बजाय खुद पर विश्वास होना चाहिए तभी एक राष्ट्र का निर्माण अपने खुद के बलबूते कर सकते है।
  • कोई भी समाज तबतक टिक नही सकता जबतक उसकी शिक्षा अपने समय के सदस्यों की जरुरतो को पूरा नही करती।
  • इन्सान को हमेसा सत्य की राह पर चलते हुए बिना सांसारिक लाभ की चिंता किये बगैर हमेसा साहसी और ईमानदार होना चाहिए।
  • नेता वही होता है जिसका नेतृत्व संतोषप्रद और प्रभावशाली हो जो अपनों के लिए सदैव आगे रहता है और ऐसे लोग हमेसा निर्भीक और साहसी होते है।
  • इंसान को सत्य की उपासना करते हुए सांसारिक लाभ पाने की चिंदा किए बिना साहसी और ईमानदार होना चाहिए।
  • एक हिन्दू के लिये नारी लक्ष्मी, सरस्वती और शक्ति का मिला-जुला रूप होती है अर्थात वह उस सबका आधार है जो सुन्दर, वांछनीय और शक्ति की ओर उन्मुखकारक है।
  • वास्तविक मुक्ति दुखों से निर्धनता से, बीमारी से, हर प्रका की अज्ञानता से और दासता से स्वतंत्रता प्राप्त करने में निहित है।