मुहावरा

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मुहावरे भाषा को सुदृढ़, गतिशील और रुचिकर बनाते हैं,उनके प्रयोग से भाषा में चित्रमयता आती है।

बहुत अधिक प्रचलित और लोगों केमुँहचढ़े वाक्य लोकोक्ति के तौर पर जाने जाते हैं। इन वाक्यों में जनता के अनुभव का निचोड़ या सार होता है।

मुहावरे ही भाषा की नींव के पत्थर हैं, जिस पर उसका भव्य भवन आज तक रुका हुआ है और मुहावरे ही उसकी टूट-फूट को ठीक करते हुए गर्मी, सर्दी और बरसात के प्रकोप से अब तक उसकी रक्षा करते चले आ रहे हैं। मुहावरे भाषा को सुदृढ़, गतिशील और रुचिकर बनाते हैं। उनके प्रयोग से भाषा में चित्रमयता आती है, जैसे- अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना, दाँतों तले उँगली दबाना, रंगा सियार होना। 'मुहावरा' अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है बातचीत करना या उत्तर देना। कुछ लोग मुहावरे को 'रोज़मर्रा', 'बोलचाल', 'तर्ज़ेकलाम' या 'इस्तलाह' कहते हैं। यूनानी भाषा में 'मुहावरे' को 'ईडियोमा', फ्रेंच में 'इडियाटिस्मी' और अँगरेजी में 'इडिअम' कहते हैं।

मोटे तौर पर हम कह सकते हैं कि जिस सुगठित शब्द-समूह से लक्षणाजन्य और कभी-कभी व्यंजनाजन्य कुछ विशिष्ट अर्थ निकलता है उसे 'मुहावरा' कहते हैं। कई बार यह व्यंग्यात्मक भी होते हैं।

शब्दों की तीन शक्तियाँ होती हैं : अभिधा, लक्षणा, व्यंजना

अभिधा : जब किसी शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग होता है तब वहाँ उसकी अभिधा शक्ति होती है, जैसे 'सिर पर चढ़ाना' का अर्थ किसी चीज को किसी स्थान से उठाकर सिर पर रखना होगा।

लक्षणा : जब शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग न करते हुए किसी विशेष प्रयोजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है, यह जिस शक्ति के द्वारा होता है उसे लक्षणा कहते हैं। लक्षणा से 'सिर पर चढ़ने' का अर्थ आदर देना होगा। उदाहरण के लिए 'अँगारों पर लोटना', 'आँख मारना', 'आँखों में रात काटना', 'आग से खेलना', 'खून चूसना', 'ठहाका लगाना', 'शेर बनना' आदि में लक्षणा शक्ति का प्रयोग हुआ है, इसीलिए वे मुहावरे हैं।

व्यंजना : जब अभिधा और लक्षणा अपना काम खत्मकर लेती हैं, तब जिस शक्ति से शब्द-समूहों या वाक्यों के किसी अर्थ की सूचना मिलती है उसे 'व्यंजना' कहते हैं। व्यंजना से निकले अधिकांश अर्थों को व्यंग्यार्थ कहते हैं। 'सिर पर चढ़ाना' मुहावरे का व्यंग्यार्थ न तो 'सिर' पर निर्भर करता है न 'चढ़ाने' पर वरन् पूरे मुहावरे का अर्थ होता है उच्छृंखल, अनुशासनहीन अथवा ढीठ बनाना।

मुहावरे के शब्द : मुहावरे किसी न किसी व्यक्ति के अनुभव पर आधारित होते हैं, उनमें इस्तेमाल शब्दों की जगह दूसरे शब्दों का प्रयोग किया जाए तो उनका अर्थ ही बदल जाता है जैसे- 'पानी-पानी होना' की जगह 'जल-जल होना' नहीं कहा जा सकता। ऐसे ही 'गधे को बाप बनाना' की जगह पर 'बैल को बाप बनाना' और 'मटरगश्ती करना' की जगह पर 'गेहूँगश्ती' या 'चनागश्ती' नहीं कहा जा सकता है।

अंग टूटना : शरीर में दर्द होना -आज मेरा अंग-अंग टूट रहा है।

अँगारे उगलना : कठोर बात कहना. -वह बातें क्या कर रहा था, मानो अँगारे उगल रहाथा।

अँधा बनना : जान-बूझकर किसी बात पर ध्यान न देना -भाई, तुम्हारी मर्जी है, तुम जान-बूझकर अँधे बन रहे हो।

अक्ल का अँधा : मूर्ख, बेवकूफ - जैसा तुम समझतो हो वह अक्ल का अँधा नहीं.

अक्ल चरने जाना : समय पर बुद्धि का काम न करना -मगरूर लड़की! तेरी अक्ल कहीं घास चरने तो नहींगई।

अक्ल ठिकाने लगना : होश ठीक होना -फिर देखो कैसे चार दिन में सबकी अक्ल ठिकानेलगती है।

अपनी खिचड़ी अलग पकाना : सबसे अलग रहना -आप लोग किसी के साथ मिलकर काम करना नहींजानते, अपनी खिचड़ी अलग पकाते हैं।

नीचे दी गयीं कड़ियों में हिन्दी के प्रमुख मुहावरों के अर्थ तथा उनका वाक्यों में सम्यक प्रयोग दिये गये हैं।