मुस्तफा कमाल अतातुर्क

मुस्तफा कमाल अतातुर्क (1881 – 10 नवम्बर 1938) आधुनिक तुर्की के जनक (अता तुर्क) कहे जाते हैं। वे तुर्की गणराज्य के संस्थापक और प्रथम राष्ट्रपति थे। उन्होंने तुर्की को धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक राष्ट्र बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई। वे सैन्य अधिकारी, सुधारक, राष्ट्रवादी और समाज सुधारक के रूप में जाने जाते हैं।
उनका जन्म 1881 ई. में सेलोनिका के एक सामान्य परिवार में हुआ था। सात वर्ष की उम्र में ही उसके पिता अली रजा की मृत्यु हो गयी, अतः उसका लालन-पालन उनकी माता जुबेदा ने किया।
मुस्तफा कमाल पाशा साम्राज्यवाद के कट्टरविरोधी तथा राष्ट्रीयता एव आधुनिकता का प्रबल समर्थक थे। मुस्तफा पाशा ने तुर्की को आधुनिक राष्ट्र के रूप में परिवर्तित किया, जिसे पहले 'यूरोप का रोगी' कहा जाता था। मुस्तफा कमाल पाशा ने आधुनिक तुर्की के निर्माण के लिये आधुनिक शिक्षा प्रणाली शुरू की तथा प्रारम्भिक शिक्षा अनिवार्य तथा निशुल्क कर दिया; उपाधियों का अन्त कर दिया गया; राष्ट्रीयता के विकास के लिए नगरों के प्राचीन नामों को बदला गया; स्त्री शिक्षा व्यवस्था और सिविल विवाह की पद्धति लागू की गई; खिलापत (खलीफा को शासनाध्यक्ष मानना) का अन्त कर दिया गया तथा तुर्की धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया; पंचवर्षीय योजनाओं का आरम्भ कर तीव्र औद्योगिकीकरण को बढ़ावा दिया गया।
- जन्म : 1881, सेलोनिका (अब ग्रीस)
- मृत्यु : 10 नवम्बर 1938, इस्तांबुल
- उपाधि : अतातुर्क (तुर्कों के पिता)
- प्रसिद्ध कार्य : तुर्की में धर्मनिरपेक्षता लागू करना, शिक्षा सुधार, महिला अधिकार, खलीफत की समाप्ति।
प्रमुख उद्धरण
[सम्पादित करें]- मैंने एक बार किताबें पढ़ीं और समझना चाहा कि दार्शनिक जीवन के बारे में क्या कहते हैं। उनमें से कुछ ने सब कुछ अंधकारमय देखा। "चूंकि हम कुछ भी नहीं हैं और हम शून्य पर पहुंच जाएंगे, इसलिए पृथ्वी पर हमारे अस्थायी जीवन के दौरान खुशी और आनंद के लिए कोई जगह नहीं है," उन्होंने कहा। मैंने अन्य पुस्तकें पढ़ीं, जो समझदार लोगों द्वारा लिखी गई थीं। वे कह रहे थे: "चूंकि अंत वैसे भी शून्य है, इसलिए हमें कम से कम जब तक हम जीवित हैं, तब तक खुश और प्रसन्न रहना चाहिए।" अपने स्वयं के चरित्र के लिए मुझे जीवन का दूसरा दृष्टिकोण पसंद है, लेकिन इन सीमाओं के भीतर: एक व्यक्ति जो अपने व्यक्तित्व में सभी मानव जाति के अस्तित्व को देखता है वह दयनीय है। जाहिर है कि वह व्यक्ति एक व्यक्ति के रूप में नष्ट हो जाएगा। किसी भी व्यक्ति के लिए जब तक वह जीवित है, संतुष्ट और खुश रहने के लिए जो आवश्यक है वह अपने लिए नहीं, बल्कि अपने बाद आने वालों के लिए काम करना है। केवल इस तरह से एक समझदार व्यक्ति कार्य कर सकता है। जीवन में पूर्ण आनंद और खुशी केवल भावी पीढ़ियों के सम्मान, अस्तित्व और खुशी के लिए काम करने में ही मिल सकती है। [१]
- क्या यह खिलाफ, इस्लाम, मुल्ला और ऐसे ही लोग नहीं थे जिन के कारण सदियों से तुर्की किसान हर मौसम में लड़ते और मरते रहे? समय आ गया है कि तुर्की अपने बारे में सोचे, भारतीयों और अरबों की उपेक्षा करे, उन से छुटकारा पाए, इस्लाम का नेतृत्व करने से छुटकारा पाए। तुर्की के पास अपनी ही बहुत समस्याएं हैं। सदियों से खलीफत ने हमें चूस कर सफेद कर दिया है। हमारे पास अब एक ही सिद्धांत हैः हर समस्या को तुर्की नजरिए से देखना और तुर्की के हितों की रक्षा करना।
जीवन और उद्देश्य
[सम्पादित करें]- "किसी भी व्यक्ति के लिए जब तक वह जीवित है, संतुष्ट और खुश रहने के लिए जो आवश्यक है वह अपने लिए नहीं, बल्कि अपने बाद आने वालों के लिए काम करना है।"
- "जीवन का उद्देश्य केवल अपने लिए नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीना है।"
- "जीवन में आनंद और शांति केवल मानवता की सेवा में है।"
दर्शन और दृष्टिकोण
[सम्पादित करें]- "जीवन को समझने के दो दृष्टिकोण हैं — एक कहता है कि सब व्यर्थ है, दूसरा कहता है कि जब तक हो सके तब तक प्रसन्न रहो। मैं दूसरे को चुनता हूँ, लेकिन उद्देश्यपूर्ण तरीके से।"
- "मनुष्य को अपने अस्तित्व के परे सोचना चाहिए।"
शिक्षा और समाज सुधार
[सम्पादित करें]- "यदि कोई राष्ट्र उन्नति करना चाहता है, तो उसे शिक्षा की नींव पर आगे बढ़ना होगा।"
- "स्त्री की आज़ादी एक सभ्य समाज की पहली पहचान है।"
- "हमारा भविष्य हमारे युवाओं के हाथ में है। उन्हें शिक्षित और जागरूक करना ही राष्ट्र का कर्तव्य है।"
राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता
[सम्पादित करें]- "धर्म को राजनीति से अलग करना राष्ट्र की स्थिरता के लिए आवश्यक है।"
- "एक आधुनिक राष्ट्र वही है जहाँ व्यक्ति की पहचान उसके कर्म से होती है, धर्म से नहीं।"
- "हमारा राष्ट्र किसी भी धर्म से ऊपर है।"
तुर्की के निर्माण पर
[सम्पादित करें]- "हम तुर्क हैं, और हमें अपनी पहचान पर गर्व है।"
- "पिछली ग़लतियों से सीखते हुए हमें एक नया तुर्की बनाना है।"
- "तुर्की अब बीते साम्राज्य की परछाई नहीं, एक नया आत्मनिर्भर राष्ट्र है।"
युद्ध और स्वतंत्रता
[सम्पादित करें]- "स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, और इसके लिए कोई भी बलिदान छोटा नहीं।"
- "हमारी लड़ाई आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता की है, किसी जाति या धर्म की नहीं।"
आधुनिकता और प्रगति
[सम्पादित करें]- "हमारे लिए विज्ञान ही धर्म है।"
- "सभ्यता का मार्ग शिक्षा, विज्ञान और मेहनत से होकर जाता है।"
- "रुढ़िवादिता से उबरकर ही हम एक प्रगतिशील राष्ट्र बना सकते हैं।"
चर्चित भाषण से अंश
[सम्पादित करें]- "केवल वही राष्ट्र जीवित रह सकता है जो खुद को समय के साथ बदलता है।"
- "हम तुर्क हैं और हमें आधुनिक तुर्क बनने पर गर्व है।"
- "हमने इस देश को खून और पसीने से सींचा है। इसे कोई पीछे नहीं खींच सकता।"
प्रेरक विचार
[सम्पादित करें]- "मैंने दार्शनिकों की पुस्तकें पढ़ीं – कुछ ने जीवन को निराशा बताया, कुछ ने आनंद। लेकिन मैंने तय किया कि मैं जीवन को उद्देश्य के साथ जियूँगा।"
देखें
[सम्पादित करें]बाहरी कड़ियाँ
[सम्पादित करें]स्रोत
[सम्पादित करें]- "Mustafa Kemal Atatürk Speaks", 1937
- "Nutuk" (The Speech) by Atatürk
- Atatürk’s personal writings and memoirs
- Speech with Romanian Foreign Minister Victor Antonescu, 1937