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भारतीय गणित

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  • गिनती की भारतीय पद्धति शायद मानव द्वारा खोजी गयी सबसे सफल बौद्धिक नवाचार है। इसे सभी देशों ने अपना लिया है। यह सार्वदेशिक भाषा के सबसे निकट है। -- जॉन डी बैरो, The Book of Nothing (2009) पहला अध्याय "Zero—The Whole Story"
  • ...विश्व भारत का गणित के क्षेत्र में सबसे अधिक ऋणी है। गुप्त काल में भारत में भारतीय गणित उस ऊँचाई पर पहुँच गया था जैसा प्राचीन काल के किसी भी अन्य राष्ट्र में नहीं पहुँच सका था। -- ए एल बाशम, आस्ट्रेलिया के भारतविद्
  • यह (भास्कर की चक्रवाल पद्धति) सभी प्रशंसा से परे है: निश्चित रूप से यह लैग्रेंज से पहले संख्या-सिद्धान्त में हासिल की गई सबसे बेहतरीन चीज है। -- हर्मन हैंकेल् (1839 - 1873), प्रसिद्ध जर्मन गणितज्ञ
  • भारत ही है जिसने हमें दस प्रतीकों के माध्यम से सभी संख्याओं को व्यक्त करने की सरल विधि दी है, प्रत्येक प्रतीक को स्थानीय मान के साथ-साथ पूर्ण मान भी प्राप्त होता है। आर्किमिडीज और अपोलोनियस की प्रतिभा भी यहाँ तक नहीं पहुँच पायी। -- पी. एस. लाप्लास, प्रमुख फ्रांसीसी गणितज्ञ
  • सभी दार्शनिक और गणितीय सिद्धान्त जो पाइथागोरस के बताये जाते हैं, लगभग वे सभी भारत से प्राप्त हुए हैं। -- लियोपोल्ड वॉन श्रोएडर (1851-1920) जर्मन भारतविद्
  • हम भारतीयों के अत्यन्त ऋणी हैं जिन्होंने हमें गिनना सिखाया, जिसके बिना कोई सार्थक वैज्ञानिक खोज नहीं की जा सकती। -- अल्बर्ट आइंस्टीन[१]
  • संस्कृत में केवल ज्योतिष शास्त्र की ही १ लाख से अधिक पाण्डुलिपियाँ हैं। इनमें से कम से कम ३० हजार पाण्डुलिपियाँ गणित या खगोलिकी से हैं। -- अमेरिकी विद्वान डेविड पिंगरी, 'Census of Exact Sciences in Sanskrit' में।[२][३]

सन्दर्भ[सम्पादन]

इन्हें भी देखें[सम्पादन]