प्रेम

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प्रेम पर सूक्तियां[सम्पादन]

  • एक प्रेम-युक्त ह्रदय सभी ज्ञान का प्रारंभ है।
  • एक छोटी सी आशा प्यार के जन्म के लिए पर्याप्त होती है।
  • सभी प्रेम परिवर्तित होते हैं और उनमे बदलाव आता है। मुझे नहीं पता है कि आप हर समय प्रेम में रह सकते हैं।
  • प्यार होते ही सभी कवी बन जाते हैं।
  • मुझे मुहर की तरह अपने दिल पर लगा ले,अपने बाज़ू पर मुझे मुहर कर ले। क्योंकि प्यार में मौत की तरह ज़बरदस्त ताकत होती है, सच्ची वफा कब्र की तरह किसी के आगे नहीं झुकती। इसकी लपटें धधकती आग की लपटें हैं,हाँ, याह की लपटें हैं। न उफनती लहरें प्यार को बुझा सकती हैं, न नदियाँ इसे बहाकर ले जा सकती हैं। अगर कोई अपनी सारी दौलत देकर इसे खरीदना चाहे,तो भी वह दौलत ठुकरा दी जाएगी। - बाइबल श्रेष्ठगीत 8:6, 7
  • प्यार सब्र रखता है और कृपा करता है। प्यार जलन नहीं रखता, डींगें नहीं मारता, घमंड से नहीं फूलता, गलत व्यवहार नहीं करता, सिर्फ अपने फायदे की नहीं सोचता, भड़क नहीं उठता। यह चोट का हिसाब नहीं रखता। यह बुराई से खुश नहीं होता, बल्कि सच्चाई से खुशी पाता है। यह सबकुछ बरदाश्‍त कर लेता है, सब बातों पर यकीन करता है, सब बातों की आशा रखता है, सबकुछ धीरज से सह लेता है। प्यार कभी नहीं मिटता। - बाइबल कुरिंथियों के नाम पहली चिट्ठी 13:4-8

प्रेम पर कविताएँ[सम्पादन]

बाहरी कडियाँ[सम्पादन]