सामग्री पर जाएँ

नवीनता

विकिसूक्ति से
  • क्षणे-क्षणे यत् नवतामुपैति, तदेव रूपं रमणीयतायाः। -- शिशुपल वध
जो क्षण-क्षण नवीन होती रहे, यही रमणीयता है।
  • पुरानमित्येव न साधुसर्वम् । -- कालिदास
जो सारी पुरानी वस्तुएँ और विचार हैं, वे सभी अच्छे ही होते हैं ऐसा नहीं है।

इन्हें भी देखें

[सम्पादन]