तेनजिन ग्यात्सो

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दलाई लामा का वास्तविक नाम 'तेनजिन ग्यासो' है। उन्हें शान्ति का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।

तेनजिन ग्यात्सो (2012)

विचार[सम्पादन]

  • हमारे जीवन का प्रथम लक्ष्य है दूसरों की सहायता करना। और यदि आप दूसरों की सहायता नहींं कर सकते तो कम से कम उन्हें आहत तो न करें।
  • हम धर्म और चिंतन के बिना रह सकते हैं पर मानवीय प्रेम के बिना नहींं।
  • खुशी अपने आप नहींं मिलती। और आपके अपने कर्मों से ही आती है।
  • जब तक हम अपने आप से सुलह नहींं कर लेते तब तक हम दुनिया से भी कभी सुलह नहींं कर सकते।
  • सहिष्णुता के अभ्यास में आपका शत्रु ही आपका सर्वश्रेष्ठ शिक्षक होता है।
  • जब आप कुछ गंवा बैठते हैं, तो उससे प्राप्त शिक्षा को कभी न गंवाएं।
  • हमारी खुशी का स्रोत हमारे ही भीतर है, और यह स्रोत दूसरों के प्रति संवेदना से पनपता है।
  • प्रसन्नता पहले से निर्मित कोई चीज नहींं है।ये आप ही के कर्मों से आती है।
  • यदि आप दूसरों को प्रसन्न देखना चाहते हैं तो करुणा का भाव रखें. यदि आप स्वयम प्रसन्न रहना चाहते हैं तो भी करुणा का भाव रखें।
  • सभी प्रमुख धार्मिक परम्पराएं मूल रूप से एक ही संदेश देती हैं – प्रेम, दया,और क्षमा, महत्वपूर्ण बात यह है कि ये हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा होनी चाहियें।
  • मेरा धर्म बहुत सरल है, मेरा धर्म दयालुता है।
  • प्रसन्नता पहले से निर्मित कोई चीज नहींं है। ये आप ही के कर्मों से आती है।
  • प्रेम और करुणा आवश्यकताएं हैं, विलासिता नहींं उनके बिना मानवता जीवित नहींं रह सकती।
  • कभी-कभी कुछ कह कर लोग अपनी एक प्रभावशाली छाप बना देते हैं और कभी-कभी लोग चुप रहकर भी अपनी एक प्रभावशाली छाप बना देते हैं।
  • यदि आप एक विशेष विश्वास या धर्म में आस्था रखते हैं तो ये अच्छी बात है| लेकिन आप इसके बिना भी जीवित रह सकते हैं।
  • यह ज़रूरी है कि हम अपना दृष्टिकोण और ह्रदय जितना सभव हो अच्छा करें. इसी से हमारे और अन्य लोगों के जीवन में, अल्पकाल और दीर्घकाल दोनों में ही खुशियाँ आयंगी।
  • सहिष्णुता के अभ्यास में, एक दुश्मन ही सबसे अच्छा शिक्षक है।
  • जब कभी संभव हो दयालु बने, और ये हमेशा संभव है।
  • पुराने दोस्त छूटते हैं और नए दोस्त बनते हैं. यह दिनों की तरह ही है। एक पुराना दिन बीतता है तो एक नया दिन आता है। लेकिन जरुरी है उसे सार्थक बनाना चाहे वह एक सार्थक मित्र हो या सार्थक दिन।
  • प्रसन्न रहना हमारे जीवन का उद्देश्य है।
  • कभी-कभी कुछ कह कर लोग अपनी एक प्रभावशाली छाप बना देते हैं और कभी-कभी लोग चुप रहकर भी अपनी एक प्रभावशाली छाप बना देते हैं।

  • समय बिना रुके चला जाता है। जब हम गलतियां करते हैं तो हम समय को नहींं बदल सकते है और बदलकर दोबारा कोशिश नहींं कर सकते, हम लोग केवल वर्तमान समय का अच्छे से अच्छा उपयोग ही कर सकते हैं।
  • अगर आप दूसरों की मदद करने में सक्षम है तो जरूर करिए लेकिन यदि आप मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें नुकसान मत पहुंचाइए।
  • प्रेम और सहानुभूति आवश्यकताएँ है, विलासिता नहीं, इनके बिना मानवता जीवित नहीं रह सकती।
  • सभी प्रमुख धार्मिक परम्पराएं मूल रूप से एक ही संदेश देती है प्यार, कृपा और क्षमा और महत्वपूर्ण बात यह की ये हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा होनी चाहिए।
  • हम धर्म और चिंतन के बिना रह सकते है पर मानवीय प्रेम के बिना नहीं।
  • एक छोटे से झगड़े से एक महान रिश्ते को घायल मत होने देना।
  • सकारात्मक कर्म करने के लिए हमें यहां सकारात्मक Attitude विकसित करना होगा।
  • मेरा धर्म बहुत सरल है, क्योंकि मेरा धर्म दयालुता है।
  • जीवन का लक्ष्य किसी अन्य व्यक्ति से बेहतर होना नहीं है बल्कि खुद से बेहतर होना है।
  • यदि आप एक धर्म विशेष मैं आस्था रखते है तो ये अच्छी बात है, लेकिन आप इसके बिना भी जीवित रह सकते है।
  • हमारे जीवन का उद्देश्य प्रसन्न रहना है।
  • खुशी अपने आप नहीं मिलती, यह आपके अपने कर्मों से ही आती है।
  • सभी दुःख अज्ञानता के कारण होते है लोग अपनी खुशी और संतुष्टि के स्वार्थ में दूसरों को पीड़ा पहुंचाते है।
  • हर दिन कुछ समय हमको अकेले में बिताना चाहिए।
  • याद रखना महान प्रेम और महान उपलब्धियों में महान जोखिम शामिल होते है।
  • ध्यान रखे की सबसे अच्छा रिश्ता वह है जिसमें एक दूसरे के लिए आपका प्यार एक दूसरे की जरूरत से बढ़कर हो।
  • आप अपनी योग्यता को जानकर और उस पर विश्वास करके एक सुंदर संसार का निर्माण कर सकते है।
  • महानता सीखने के लिए सबसे पहले दूसरो का आदर करना बहुत जरूरी है।
  • बुरा समय एक ऐसी तिजोरी होती है जहां से कामयाबी के हथियार मिलते है।
  • हृदय परिवर्तन से ही दुनिया में बदलाव लाया जा सकता है।
  • सच्चा हीरो वह होता है जो अपने क्रोध को काबू में कर लेता है।
  • जब कुछ गंवा बैठते हैं तो उससे प्राप्त सीख को न गवाएं।
  • मंदिरों की आवश्यकता नहीं है ना ही जटिल तत्वज्ञान की, मेरा मस्तिष्क और मेरा हृदय मेरे मंदिर है, मेरा तत्वज्ञान दयालुता है।
  • लक्ष्य दूसरों से बेहतर होना नहीं है बल्कि अपने अतीत से बेहतर होना है।
  • दूसरों के व्यवहार से अपने मन की शांति नष्ट न करें।
  • सहिष्णुता के अभ्यास में आपका शत्रु ही आपका सबसे अच्छा शिक्षक होता है।
  • यदि आप दूसरों को खुशी देना चाहते हो तो सहन करना सीखे, यदि आप खुश रहना चाहते हो तो सहानुभूति का अभ्यास करें।
  • ईश्वर का कोई धर्म नहीं है।
  • अपनी क्षमताओं को जानकर और उनमें यकीन करके ही हम एक बेहतर विश्व में का निर्माण कर सकते है।
  • जब कभी भी संभव हो नम्र बनिए और ये हमेशा संभव है।
  • याद रखें कि सबसे अच्छा रिश्ता वह है जिसमें एक दूसरे के लिए प्यार एक दूसरे की जरूरत से ज्यादा है।
  • खुशियां पाने का सबसे अच्छा तरीका पैसा और ताकत नहीं है बल्कि प्रेम की भावना होना है।
  • एक अनुशासित मन खुशी की ओर ले जाता है और एक अनुशासनहीन मन दुख की ओर ले जाता है।
  • प्रसन्नता पहले से निर्मित चीज नहीं है ये आप ही के कर्मों से आती है।
  • अपने ज्ञान को बांटे यह अमरता प्राप्त करने का एक तरीका है।
  • आशावादी बनिए, इससेे बहेतर महसूस होता है।
  • हम बाहरी दुनिया में कभी शांति नहीं पा सकते जब तक कि हम स्वयं अंदर से शान्त न हो।
  • शांति इंसान के कर्मों पर निर्भर है, इंसान के कर्म विचार और प्रेरणा से होते हैं।
  • दूसरों के व्यवहार को अपने मन की शांति को नष्ट करने का अधिकार ना दे।
  • एक सच्चा हीरो वही होता है जो खुद के गुस्से को परास्त करता है।

सन्दर्भ[सम्पादन]


बाह्य सूत्र[सम्पादन]

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