ऐल्बर्ट आइनस्टाइन

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उक्तियाँ[सम्पादन]

  • इन्सान को यह देखना चाहिए कि क्या है, यह नहीं कि उसके अनुसार क्या होना चाहिए।
  • जो छोटी-छोटी बातों में सच को गंभीरता से नहीं लेता है, उस पर बड़े मसलों में भी भरोसा नहीं किया जा सकता।
  • क्रोध मूर्खों की छाती में ही बसता है।
  • एक मेज, एक कुर्सी, एक कटोरा फल और एक वायलन; भला खुश रहने के लिए और क्या चाहिए?
  • यदि मानव जातो को जीवित रखना है तो हमें बिलकुल नयी सोच की आवश्यकता होगी।
  • ईश्वर के सामने हम सभी एक बराबर ही बुद्धिमान हैं-और एक बराबर ही मूर्ख भी।
  • दो चीजें अनंत हैं: ब्रह्माण्ड और मनुष्य कि मूर्खता; और मैं ब्रह्माण्ड के बारे में दृढ़ता से नहीं कह सकता।
  • कोई भी समस्या चेतना के उसी स्तर पर रह कर नहीं हल की जा सकती है जिसपर वह उत्पन्न हुई है।
  • गुरुत्वाकर्षण लोगों के प्रेम में पड़ने के लिए ज़िम्मेदार नहीं है।
  • प्रकृति में गहराई तक देखें और तब आप सब कुछ बेहतर समझ पाएँगे।
  • धर्म के बिना विज्ञान लंगड़ा है, विज्ञान के बिना धर्म अंधा है।
  • जब आप एक अच्छी लड़की के साथ बैठे हों तो एक घंटा एक सेकंड के सामान लगता है।जब आप धधकते अंगारे पर बैठे हों तो एक सेकंड एक घंटे के सामान लगता है। यही सापेक्षिकता है।

बाहरी कडियाँ[सम्पादन]