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अहिंसा

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  • मनुष्य और जंगम पशुओं की हिंसा मत करो। -- यजुर्वेद
  • अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परो दमः ।
अहिंसा परमं दानमहिंसा परमं तपः ॥ -- (महाभारत, अनुशासन पर्व)
अहिंसा परम धर्म है, अहिंसा परम संयम है। अहिंसा परम दान है। अहिंसा परम तप है।
  • जब कोई मनुष्य अहिंसा की कसौटी पर पूरा उतर आता है तो दूसरे लोग स्वयं ही उससे शत्रुता भूल जाते हैं। -- योगसूत्र
  • जीवमात्र की अहिंसा स्वर्ग को देने वाली है। -- आदि शंकराचार्य
  • इस संसार में वैर से वैर शांत नहीं होते। अवैर अर्थात् मैत्री से ही वैर शांत होते हैं. यह नियम सदा से चला आता है। -- महात्मा बुद्ध
  • दूसरों को कष्ट न देना ही परम धर्म है। दूसरों की रक्षा करने की प्रतिज्ञा की आवश्यकता नहीं है। -- रामदास (रामदासु चरित्र)
  • हिंसा का अहिंसा से प्रतिरोध करने के लिए महाप्राण चाहिए। -- हरिकृष्ण ‘प्रेमी’
  • जीवन छोटे जीवों की रक्षा से सफल होता है, उनके नाश से नहीं। -- जेम्स एलेन
  • मैं बगुले को तीर का निशाना बनाने के बजाय उसको उड़ते देखना चाहता हूँ। -- रस्किन
  • उस जीवन को हमें नष्ट करने का अधिकार नहीं, जिसे बनाने की शक्ति हम में न हो। -- शेक्सपियर
  • अहिंसा सत्य का प्राण है, स्वर्ग का द्वार है, जगत की माता है, आनन्द का अजस्त्र स्रोत है, उत्तम गति है, शाश्वत भी है और है मानव-मात्र के लिए परम धर्म। -- तनसुखराम गुप्त
  • अहिंसा विश्वास की चीज है। -- महात्मा गांधी
  • अहिंसा के केंद्र में प्यार का सिद्धांत होता है। -- मार्टिन लूथर किंग जूनियर
  • मैं हमेशा अहिंसा के पक्ष में दृढ़ता से रही हूँ। -- ऑंन्ग सैन सू की
  • मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सच्चाई मेरा भगवान है। अहिंसा उन्हें महसूस करने का साधन है। -- महात्मा गांधी
  • तात! मेरे विचार से प्राणियों की हिंसा न करना ही सबसे श्रेष्ठ धर्म है। किसी की प्राण-रक्षा के लिए झूठ बोलना पड़े तो बोल दे, किन्तु उसकी हिंसा किसी तरह न होने दे। -- वेदव्यास (महाभारत कर्ण पर्व)
  • सिद्धांत यह है कि जिस कार्य में हिंसा न हो, वही धर्म है। महर्षियों ने प्राणियों को हिंसा न होने देने के लिए ही धर्म का प्रवचन किया है। -- वेदव्यास (महाभारत, कर्ण पर्व)
  • अहिंसा परम धर्म है, अहिंसा परम तप है, अहिंसा परम सत्य है, क्योंकि उससे धर्म प्रवर्तित होता है। -- वेदव्यास (महाभारत, अनुशासन पर्व)
  • अहिंसा परम धर्म है, अहिंसा परम संयम है, अहिंसा परम दान हे तथा अहिंसा परम तप है। अहिंसा परम यज्ञ है, अहिंसा परम फल है, अहिंसा परम मित्र है तथा अहिंसा परम सुख है। -- वेदव्यास (महाभारत, अनुशासन पर्व)
  • सब को अपने प्राण प्यारे है। सब को सुख अच्छा लगता है और दुःख बुरा। सब को वध अप्रिय है और जीवन प्रिय है। सब प्राणी जीवन चाहते हैं। सब को जीवन प्रिय है। अतः किसी भी प्राणी की हिंसा मत करो। -- आचारांग
  • अहिंसात्मक युद्ध में अगर थोड़े भी मर मिटने वाले लड़ाके होंगे तो वे करोड़ों की लाज रखेंगे और उनमें प्राण फूँकेंगे। अगर यह मेरा स्वप्न है, तो भी मेरे लिए मधुर है। -- महात्मा गांधी (यंग इंडिया)
  • अहिंसा सत्य का प्राण है। उसके बिना मनुष्य पशु है। -- महात्मा गांधी (हिन्दी नवजीवन)
  • मेरे अहिंसा का सिद्धांत एक अत्यधिक सक्रिय शक्ति है। इसमें कायरता तो दूर, दुर्बलता तक के लिए स्थान नहीं है। एक हिंसक व्यक्ति के लिए यह आशा की जा सकती है कि वह किसी दिन अहिंसक बन सकता है, किन्तु कायर व्यक्ति के लिए ऐसी आशा कभी नहीं की जा सकती है। इसी लिए मैंने इन पृष्ठों में अनेक बार कहा है कि यदि हमें अपनी, अपनी स्त्रियों की, और अपने पूजा स्थानों की रक्षा सहन-षीलता की शक्ति द्वारा अर्थात् अहिंसा द्वारा करना नहीं आता, तो अगर हम मर्द हैं तो, हम इन सब की रक्षा लड़ाई द्वारा कर पाने में समर्थ होना चाहिए। -- महात्मा गांधी (यंग इंडिया)
  • अहिंसा श्रद्धा और अनुभव की वस्तु है, एक सीमा से आगे तर्क की चीज वह नहीं है। -- महात्मा गांधी (हरिजन)
  • सत्यमय बनने का एकमात्र मार्ग अहिंसा ही है। -- महात्मा गांधी (आत्मकथा)
  • अहिंसा केवल बुद्धि का विषय नहीं है, यह श्रद्धा और भक्ति का विषय है। यदि आपका विश्वास अपनी आत्मा पर नहीं, ईश्वर और प्रार्थना पर नहीं, तो अहिंसा आपके काम आने वाली चीज नहीं है। -- महात्मा गांधी (गांधी सेवा संघ सम्मेलन)
  • अहिंसा श्रेष्ठ मानव-धर्म है, पशु बल से वह अनंत गुना महान और उच्च है। -- महात्मा गांधी
  • जो बात शुद्ध अर्थशास्त्र के विरूद्ध हो, वह अहिंसा नहीं हो सकती। जिसमें परमार्थ है वही अर्थशास्त्र शुद्ध है। अहिंसा का व्यापार घाटे का व्यापार नहीं होता। -- महात्मा गांधी (संपूर्ण गांधी वाङ्मय)
  • अहिंसा और प्रेम एक ही चीज है। -- महात्मा गांधी (सत्य ही ईश्वर है)
  • हिंसा का अहिंसा से प्रतिशोध करने के लिए महा प्राण चाहिए। -- हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ (अमर आन)
  • अहिंसा कायरता के आवरण में पलने वाला कैवल्य नहीं है। वह प्राण-विसर्जन की तैयारी में सतत जागरूक पौरुष है। -- मुनि नथमल (श्रमण महावीर)
  • जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे, उसकी ओर दूसरा गाल भी कर दे। -- नवविधान (मत्ती)
  • जीवन छोटे जीवों की रक्षा से सफल होता है, उनके नाश से नहीं। -- जेम्स एलेम (आनन्द की पगडंडियां)