आचार्य रजनीश

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  • यदि तुम्हारे ह्रदय के तार मुझसे जुड़ गए हैं तो अनंतककाल तक आवाज़ देता रहूँगा।
  • यथार्थवादी बनो: चम्त्कार की योजना बनाओ ।
  • तुम कहते हो की स्वर्ग में शाश्वत सौंदर्य है ,शाश्वत सौंदर्य अभी है यहाँ ,स्वर्ग में नही।
  • जब तुम नही होगे ,तब तुम पहली बार होगे ।
  • मसीहा को मरे जितना समय हो जाता है कर्मकांड उतना ही प्रबल हो जाता है । अगर आज बुद्ध जीवित होते तो तुम उन्हें पसंद न करते ।
  • मेरी सारी शिक्षा दो शब्दो की है प्रेम और ध्यान।

बाह्य सूत्र[सम्पादन]

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