आचार्य रजनीश

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आचार्य रजनीश[सम्पादन]

  • यदि तुम्हारे ह्रदय के तार मुझसे जुड़ गए हैं तो अनंतककाल तक आवाज़ देता रहूँगा।
  • यथार्थवादी बनो: चम्त्कार की योजना बनाओ।
  • तुम कहते हो की स्वर्ग में शाश्वत सौंदर्य है,शाश्वत सौंदर्य अभी है यहाँ ,स्वर्ग में नही।
  • तुम नही होगे,तब तुम पहली बार होगे ।
  • मसीहा को मरे जितना समय हो जाता है कर्मकांड उतना ही प्रबल हो जाता है। अगर आज बुद्ध जीवित होते तो तुम उन्हें पसंद न करते।
  • मेरी सारी शिक्षा दो शब्दो की है प्रेम और ध्यान।
  • पेड़ों को देखो, पक्षियों को देखो, बादलों में देखो, सितारों को देखो और अगर आपके पास आँखें है तो आप यह देखने में सक्षम होगे की पूरा अस्तित्व खुश है सब कुछ बस खुश है पेड़ बिना किसी कारण के खुश हैं; वे प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने नहीं जा रहे हैं और वे अमीर बनने भी जा रहे हैं और ना ही कभी उनके पास बैंक बैलेंस होगा .. फूलों को देखिये,- बिना किसी कारण के कितने खुश और अविश्वसनीय है.
  • लोग बुद्ध को इतना प्रेम करते हैं कि वो उनका मज़ाक भी उड़ा सकते हैं. ये अथाह प्रेम कि वजह से है; इसलिए उनमे डर नहीं है.
  • जब मैं कहता हूँ कि आप लोग देवी-देवता हैं तो मेरा मतलब होता है कि आप में अनंत संभावनाएं है, आपकी क्षमताएं अनंत हैं.

बाह्य सूत्र[सम्पादन]

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