कहावतें
विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से
कल करे सो आज कर, आज करे सो अब्। पल में परलय होयेगी, बहुरि करेगा कब॥
नाकों चने चाबाना दाँत खटटे कर देना
अब पछताए क्या होत जब चिडिया चुग गयी खेत
ओछे की प्रीत, बालू की भीत।
जैसे उदई, तैसेई भान, न उनके चुटिया, न उनके कान। (इसका अर्थ इस रूप में लगाया जाता है जब किसी भी काम को करने के लिए एक जैसे स्वभाव के लोग मिल जायें और काम उनके कारण बिगड़ जाये।)
अन्धो मे , काना राजा