समुद्र
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समुद्र या सागर क्षारीय जल का विशाल जलराशि है जो सम्पूर्णतः या अंशतः थल से घिरा होता है।
उक्तियाँ
[सम्पादित करें]- आसिन्धुसिन्धुपर्यंता यस्य भारतभूमिका ।
- पितृभूपुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरिति स्मृतः ॥ -- वीर सावरकर
- सिन्धु नदी के उद्गमस्थान से कन्याकुमारी के समुद्रतक (विस्तृत भूभाग को) भारत भूमि को जो पितृ भूमि (मातृ भूमि) और पुण्य भूमि मानते हैं, उन्हें ‘हिन्दू’ कहते हैं ।
- समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले ।
- विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्वमे ॥
- हे देवी, जो समुद्र को अपनी वस्त्र की तरह धारण करती हो, और जो पहाड़ों के तनों और शिखरों को अपने शरीर के समान संभाले हुए हैं, हे विष्णु की पत्नी, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
- रत्नाकरः किं कुरुते रत्नैः विन्ध्योऽपि किं करिष्यति हस्तिभिः ।
- धीरः पुरुषो लोके परोपकारं विना किं करिष्यति ॥
- रत्नाकर (समुद्र) रत्नों का क्या करता है? विन्ध्य (पर्वत) भी हाथियों का क्या करता है? धीर पुरुष संसार में परोपकार के अलावा क्या करता है?