सड़क के किनारे की ज़िंदगी
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सड़क के किनारे की ज़िंदगी
[सम्पादित करें]परिचय
[सम्पादित करें]भारत की सड़कों पर हर दिन लाखों कहानियाँ जन्म लेती हैं — कुछ चाय की दुकानों पर, कुछ ट्रैफिक में, कुछ फुटपाथ पर। ये उद्धरण उन्हीं कहानियों का एक छोटा सा आईना हैं।
उद्धरण
[सम्पादित करें]- "सड़क सिर्फ मंज़िल तक नहीं ले जाती, वो ज़िंदगी दिखाती है।"
- "फुटपाथ पर सोने वालों की नींद अक्सर अमीरों के सपनों से सच्ची होती है।"
- "सड़क की भीड़ में जो मुस्कुरा दे, वही असली ज़िंदा है।"