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शेख मुजिबुर रहमान

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सन १९५० में शेख मुजिबुर रहमान

शेख मुजीबुर रहमान (17 मार्च 1920 – 15 अगस्त 1975) बांग्लादेश के राष्ट्रपिता एवं एक राजनेता थे। उन्हें 'बंगबंधु' कहते हैं। जनता के बीच वे 'शेख साहब' या 'शेख मुजीब' के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनकी बेटी शेख हसीना बांग्लादेश अवामी लीग की अध्यक्षा और पूर्व प्रधानमंत्री हैं।

  • इस बार का संघर्ष हमारी मुक्ति का संघर्ष है, इस बार का संघर्ष स्वतंत्रता का संघर्ष है। जय बांग्ला ! (7 मार्च 1971 का भाषण)
  • तुम सात करोड़ लोगों को दबाकर नहीं रख पाओगे। जब हमने मरना सीख लिया है, तो कोई हमें दबा नहीं सकता। (7 मार्च 1971 का भाषण)
  • बांग्लादेश का हर घर मेरा घर है।
  • हमारे मन में यह विश्वास है कि यदि हम पूर्वी बंगाल में एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र स्थापित कर सके, तो हिंदी भाषियों द्वारा शासित और उत्पीड़ित पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा भी एक दिन स्वतंत्र बांग्लादेश के साथ जुड़ने की इच्छा करेंगे।
  • यह 1947 की बात है। तब मैं मिस्टर सुहरावर्दी के दल में था। वे और शरत चंद्र बोस एक 'अखंड बंगाल' चाहते थे। मैं भी सभी बंगालियों के लिए एक देश चाहता था। यदि बंगाली एकजुट होते, तो वे क्या नहीं कर सकते थे! वे विश्व को जीत सकते थे।
  • मैं बंगाली हूँ, बांग्ला मेरी भाषा है। मैं इसी बंगाल में अपनी अंतिम सांस लेना चाहता हूँ।
  • यदि आप लोगों से प्रेम करते हैं, तो लोग भी आपसे प्रेम करेंगे। यदि आप थोड़ा सा भी त्याग करते हैं, तो जनता आपके लिए जान भी दे सकती है।
  • मेरी सबसे बड़ी शक्ति मेरे देश के लोगों के प्रति मेरा प्रेम है, और मेरी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि मैं उन्हें बहुत अधिक प्यार करता हूँ।
  • मैं सात करोड़ बंगालियों के प्यार का प्यासा हूँ। मैं सब कुछ खो सकता हूँ, लेकिन बांग्लादेश के लोगों का प्यार नहीं खो सकता।
  • मेरी प्रधानमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है। प्रधानमंत्री आते हैं और जाते हैं। लेकिन जो प्यार और सम्मान देशवासियों ने मुझे दिया है, उसे मैं जीवन भर याद रखूंगा।
  • विश्व दो शिविरों में विभाजित है - शोषक और शोषित। मैं निसंदेह शोषितों के पक्ष में हूँ।
  • भ्रष्टाचारियों को यदि खत्म किया जा सके, तो बांग्लादेश का 25 से 30 प्रतिशत दुख दूर हो जाएगा।
  • राजनीतिक संस्था को चार चीजों की आवश्यकता होती है: नेतृत्व, घोषणापत्र (आदर्श), निस्वार्थ कार्यकर्ता और संगठन।
  • सांस्कृतिक स्वतंत्रता के बिना राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता अर्थहीन है।
  • हमें सोने के देश का 'सोना जैसा इंसान' (नेक इंसान) बनना होगा।
  • सरकारी कर्मचारियों को जनता के साथ घुल-मिल जाना चाहिए। वे जनता के खादिम, सेवक और भाई हैं। उन्हें इसी भावना के साथ काम करना चाहिए।
  • मैं सभी सरकारी कर्मचारियों से अनुरोध करता हूँ - जिनके धन से हमारा घर चलता है, उनकी सेवा करें।
  • भिखारी राष्ट्र का कोई अस्तित्व नहीं होता। विदेश से भीख मांगकर देश नहीं बनाया जा सकता। देश के भीतर ही संसाधन पैदा करने होंगे।
  • जो व्यक्ति मौत के लिए तैयार है, उसे कोई मार नहीं सकता।
  • हमारे किसान सबसे दुखी और उत्पीड़ित वर्ग हैं, और उनकी स्थिति सुधारने के लिए हमें अपने प्रयासों का एक बड़ा हिस्सा उनके पीछे लगाना होगा।
  • गरीबों पर अत्याचार करोगे तो अल्लाह को जवाब देना होगा।
  • आप नौकरी करते हैं, आपको वेतन वह गरीब किसान और श्रमिक देता है। आपका घर उसी पैसे से चलता है। उनका सम्मान करके बात करें, वे ही मालिक हैं।
  • स्वतंत्रता प्राप्त करना जितना कठिन है, उसे बनाए रखना भी उतना ही कठिन है।
  • यदि मैं बंगाल के लोगों के चेहरे पर मुस्कान न ला सका, यदि बंगाल के लोग दुखी रहे और उनका पेट न भरा, तो मैं शांति से नहीं मर सकूंगा।
  • मेरी यह स्वतंत्रता तब तक अधूरी रहेगी जब तक मेरे देश के युवाओं को रोजगार नहीं मिल जाता और माताओं-बहनों को कपड़े नहीं मिल जाते।

मुजीब के बारे में प्रमुख व्यक्तित्वों के विचार

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अंतरराष्ट्रीय विचार

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  • मैंने हिमालय नहीं देखा है, लेकिन मैंने शेख मुजीब को देखा है। व्यक्तित्व और साहस में यह व्यक्ति हिमालय है। इस प्रकार मुझे हिमालय प्रत्यक्ष देखने का अनुभव हुआ है। -- फिदेल कास्त्रो, क्यूबा के नेता (1973 में अल्जीयर्स गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन के दौरान)
  • शेख मुजीब जॉर्ज वाशिंगटन, गांधी और डी वलेरा से भी महान नेता थे। -- लॉर्ड फेनर ब्रॉकवे, ब्रिटिश नेता
  • मुजीब के बिना बांग्लादेश का जन्म कभी नहीं होता। -- फाइनेंशियल टाइम्स (शेख मुजीब की हत्या पर प्रतिक्रिया)
  • जिनके नेतृत्व में भारत को स्वतंत्रता मिली, बंगबंधु उनसे भी बड़े नेता हैं। -- अटल बिहारी वाजपेयी, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री

साहित्यिक एवं दार्शनिक विचार

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  • जब तक पद्मा, यमुना, गौरी और मेघना जैसी नदियाँ बहती रहेंगी, तब तक शेख मुजीबुर रहमान तुम्हारी कीर्ति जीवित रहेगी। -- अन्नदाशंकर राय, प्रसिद्ध साहित्यकार
  • मुजीब बांग्लादेश की आत्मा थे। उन्होंने एक 'किंवदंती' (Legend) छोड़ी है। बांग्लादेश इसे हमेशा याद रखेगा। -- अन्नदाशंकर राय
  • मुजीब ने बांग्लादेश को स्वतंत्रता की दहलीज तक पहुँचाया। बंदी होने के बावजूद वही युद्ध का नियंत्रण कर रहे थे। मुजीब के बिना, यदि हजारों जिया या कोई और भी स्वतंत्रता की घोषणा करता, तो वह एक दुखद विफलता होती। दुनिया ने हमारा साथ मुजीब की वजह से दिया। -- हुमायूँ आजाद, लेखक ('आमी की एई बांग्लादेश चेयेछिलाम' से)

जसीम उद्दीन की कविता (अंश)

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राजभय और जेल की बेड़ियों को तुमने खेल-खेल में जीता है।
फाँसी के तख्ते पर भी तुम्हारी महानता कभी कम नहीं हुई।
तुम बांग्लादेश के बिना मुकुट के साक्षात राजा हो,
हर बंगाली के हृदय में तुम्हारा सिंहासन है।

ऐतिहासिक विश्लेषण और संदर्भ

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अब्दुल गफ्फार चौधरी के विचार

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  • बंगबंधु ने बांग्लादेश को दो बार स्वतंत्र कराया। एक बार पाकिस्तान सेना से, और दूसरी बार भारतीय सेना को बांग्लादेश से वापस जाने के लिए कहकर।
  • 1947 में शरत चंद्र बोस और सुहरावर्दी एक 'अखंड बंगाल' चाहते थे। बंगबंधु की सफलता यह है कि उन्होंने बंगाल के आधे हिस्से को स्वतंत्र किया, लेकिन बंगाली राष्ट्रवाद के आधार पर देश को पूरी तरह गढ़ने से पहले ही उनकी हत्या कर दी गई।

स्वतंत्रता की घोषणा और नेतृत्व (सोहेल ताज)

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  • तथ्य यह है कि हमारी स्वतंत्रता 23 वर्षों के लंबे संघर्ष का परिणाम है जिसका राजनीतिक नेतृत्व बंगबंधु ने किया था। 25 मार्च की रात उनकी गिरफ्तारी के बाद एक राजनीतिक शून्यता उत्पन्न हुई थी, जिसे मेजर जियाउर रहमान की आवाज में की गई घोषणा ने भरा और लोगों को प्रेरित किया। लेकिन यह सरकार ताजउद्दीन अहमद और सैयद नजरुल इस्लाम के नेतृत्व में बनी थी।

आलोचनात्मक दृष्टिकोण (जुलाई जन-अभ्युत्थान के संदर्भ में)

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  • मुजीब राष्ट्रपिता कैसे हो सकते हैं? देश की जनता ने दो बार उनके खिलाफ फैसला दिया है। 1975 में उनकी हत्या के बाद कोई सड़क पर नहीं आया। और 5 अगस्त 2024 को पूरे देश की जनता ने उनकी प्रतिमाएं गिरा दीं और उनके घर में आग लगा दी। यह उनके शासन और नीतियों के खिलाफ जनता का फैसला है। -- बदरुद्दीन उमर, इतिहासकार और लेखक (19 अक्टूबर 2025 को दिए गए भाषण से)