सामग्री पर जाएँ

रूमी

विकिसूक्ति से

रूमी ( 1207 ईस्वी - 17 दिसम्बर 1273) पर्शियन कवि और इस्लामी विद्वान, सूफी रहस्यवादी।

  • यदि आप हर रगड़ से चिढ़ते हो, तो आपको पॉलिश कैसे किया जाएगा?
  • जिससे आप प्यार करते हो, उसका सौंदर्य आपके काम में भी प्रदर्शित होनी चाहिए।
  • यह आवाज निःशब्द है। इन्हें सुनो।
  • प्रत्येक चीज जिसे सुंदर और अच्छा और प्रिय उन आँखों के लिए बनाया गया है जो इसे देखता है।
  • हम प्रेम से उत्पन्न हुए हैं। प्रेम हमारी जननी है।
  • सौंदर्य हमारे चारों ओर होता है, लेकिन आम तौर पर हम इसको ढूंढने बगीचे की तरफ जाते हैं।
  • शोक मत करो। जो कुछ भी आप खो देते हो, वह किसी अन्य रूप आपके सामने प्रकट हो जाता है।
  • हर किसी को किसी विशेष काम के लिए बनाया गया है, और उस काम को करने की इच्छा भी हर इंसान के दिल में डाल दिया गया है।
  • आपका अवसाद आपकी गुस्ताखी और किसी की प्रशंसा से इनकार से जुड़ा होता है।
  • मैं दुखी क्यों होऊं? मेरे वजूद का हर भाग पूर्ण रूप से खिला हुआ है।
  • ये प्रतिज्ञायें और यह शादी मुबारक हो।
  • प्यार अपने आप ही सभी भाषाओं के माध्यम से अपना रास्ता ढूंढ लेगा।
  • ओह, मेरी आत्मा के पक्षी, अब उड़ चलो, क्योंकि मेरे पास सौ मजबूत टावर हैं।
  • यह हो सकता है कि जिस संतुष्टि की मुझे जरूरत है वह मेरे निर्गम पर निर्भर करता है, ताकि जब मैं चला जाऊं और वापस आऊँ, मुझे वह चीज घर पर मिल जाए।
  • जब कोई एक गलीचा को पीटता है, प्रहार गलीचा के खिलाफ नहीं होता है, लेकिन यह धूल के खिलाफ होता है।
  • मैं न ही पूर्व का हूँ और न ही पश्चिम का, मेरे दिल में कोई सीमा मौजूद नहीं।
  • तुम समुद्र में एक बूंद नहीं हो। आप एक बूंद में पूरा समुद्र हो।
  • नारी भगवान की एक किरण है। वह सांसारिक रूप से उतनी प्रिय नहीं है: वह रचनात्मक है, न कि रचित।