रानी लक्ष्मीबाई
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रानी लक्ष्मीबाई (१९ नवम्बर १८२८ – १८ जून १८५८), जिन्हें मणिकर्णिका या झांसी की रानी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम 1857 की प्रमुख क्रांतिकारी और वीर महिला थीं। वे साहस, देशभक्ति और आत्मबलिदान की प्रतीक मानी जाती हैं।
उद्धरण
[सम्पादित करें]- मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।
- हम लड़ेंगे ताकि आने वाली पीढ़ियाँ गुलामी में न जिएं।
- मेरे शरीर में अभी भी शक्ति है, मेरी तलवार अब भी बोल सकती है।
- वीरता महिला की कमजोरी नहीं, उसकी शक्ति है।
- जीना है तो सम्मान के साथ, मरना है तो देश के लिए।
- जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है — फिर डरना किस बात का?
- दुश्मन चाहे जितना भी शक्तिशाली हो, मेरी आत्मा उससे कहीं ज़्यादा अडिग है।
- एक स्त्री तब तक कमजोर नहीं जब तक उसके अंदर आत्मसम्मान और देशभक्ति जिंदा है।
- स्वतंत्रता हमारा अधिकार है, और हम उसे लेकर रहेंगे।
प्रसिद्ध प्रसंग
[सम्पादित करें]- रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के ख़िलाफ़ 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी सेना संग झांसी की रक्षा की और अद्वितीय साहस दिखाया।
- उन्होंने घोड़े पर बैठकर युद्ध किया और अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर युद्धभूमि में वीरता दिखाई।