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योगेन्द्र नाथ मंडल

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योगेन्द्र नाथ मंडल भारत के एक दलित राजनेता थे जो भारत के विभाजन पर पाकिस्तान चले गये थे। वहाँ उन्हें पाकिस्तान का कानूनमन्त्री बनाया गया था। किन्तु पाकिस्तान में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार से उनके विचार बिलकुल बदल गये और उन्होंने कानूनमन्त्री के पद से त्यागपत्र दे दिया तथा भारत आकर रहे। भारत आकर उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान से भारत आये शरणार्थियों के बीच में काम किया एवं भारतीय राजनीति में भी प्रवेश करने का प्रयत्न किया। किन्तु वे सफल नहीं हुए।

उक्तियाँ

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  • लंबे चिंतन और संघर्ष के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि पाकिस्तान में हिंदुओं के रहने की कोई जगह नहीं है। उनका भविष्य धर्मान्तरण या विघटन की भयावह छाया से ग्रस्त है। -- अपने त्यागपत्र में
  • भाग्य ने ऐसे समय पर क़ायद-ए-आज़म को हमसे निर्दयतापूर्वक छीना है जब उनकी हमें बहुत आवश्यकता थी। -- योगेन्द्र नाथ मंडल, जिन्ना की मृत्यु पर
  • कांग्रेस के नेताओं ने सत्ता के लोभ में विभाजन करवाया। -- बीरभूम के उत्तर तिलपारा शिविर में

योगेन्द्रनाथ मंडल का त्यागपत्र

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योगेन्द्रनाथ मंडल का त्यागपत्र (अंग्रेजी में)
योगेन्द्रनाथ मंडल का त्यागपत्र (अंग्रेजी में)
  • मुस्लिम लीग के साथ सहयोग करने की मेरी वजह ये थी कि बंगाल में मुसलमानों और अनुसूचित जातियों के हित एक-समान थे। अधिकतर मुसलमान या तो किसान थे या मज़दूर. अनुसूचित जाति के लोगों की भी यही स्थिति थी। दूसरे अनुसूचित जाति के लोग और मुसलमान दोनों शैक्षिक रूप से बहुत पिछड़े हुए थे।
  • 16 अगस्त, 1946 को मुस्लिम लीग ने जिस डायरेक्ट एक्शन डे का आयोजन किया था, उसमें हज़ारों लोग मारे गए थे। हिंदुओं ने लीग के मंत्रिमंडल से मेरे इस्तीफ़े की माँग की थी लेकिन मैंने उनकी बात नहीं सुनी थी।
  • कलकत्ता के नोआखली नरसंहार में कई हिन्दुओ की हत्याएं हुई, सैकड़ों ने इस्लाम कबूल लिया । हिंदू महिलाओं का बलात्कार और अपहरण किया गया ।लेकिन फिर भी मैंने मुस्लिम लीग के साथ सहयोग जारी रखा। पाकिस्तान के अस्तित्व में आने बाद दलितों पर अत्याचार काफी बढ़ गए हैं। कई बार इस ओर ध्यान दिलाया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हत्या और अत्याचार आम हो गया है। मैंने अपने आप से पूछा, 'क्या मै इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान आया था।
  • विभाजन के बाद पूर्वी बंगाल के 5 लाख हिन्दुओ को देश छोड़ना पड़ा है। पूर्वी पाकिस्तान के साथ पश्चिमी पाकिस्तान में भी ऐसे ही हालात हैं। बटवारे के बाद पश्चिमी पंजाब में 1 लाख पिछड़ी जाति के लोग रह रहे थे, उनमे से ज्यादातर को बलपूर्वक इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया है। मुझे जानकारी मिली है 363 मंदिरों और गुरूद्वारे मुस्लिमों के कब्जे में हैं । इनमे से कुछ को मोची की दुकान, कसाईखाना और होटलों में बदल दिया है। इसलिए मैं झूठे दिखाबे और असत्य के बोझ को अपनी अंतरात्मा पर नहीं लाद सकता हूं और अपना इस्तीफा आपको सौंप रहा हूँ।
  • मैं यहाँ अपने दृढ़ विश्वास को दोहराना चाहता हूँ कि पूर्वी पाकिस्तान की सरकार अभी तक हिंदुओं को प्रांत से खदेड़ने की नीति पर चल रही है। मुझे ये कहना पड़ रहा है कि पश्चिम पाकिस्तान से हिंदुओं को भगाने की नीति पूरी तरह से कामयाब रही है और पूर्वी पाकिस्तान में भी ये कामयाबी की तरफ़ बढ़ रही है।

योगेन्द्र नाथ मण्डल के बारे में विचार

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  • हमारे लिए तो जोगेंद्र नाथ सबसे बड़े खलनायक थे। बांग्लादेश में इस व्यक्ति की वजह से हिंदुओं को तकलीफ़ों में रहना पड़ रहा है। उन्होंने हमें दलित हिंदू और मुस्लिम एकता की बात करके सब्ज़बाग़ दिखाए। विभाजन के दौरान बहुत से ऊँची जाति के हिंदू भारत चले गए। दलित यहीं रह गए क्योंकि मंडल बड़े नेता थे और वो लोग उनकी तरफ़ बड़ी उम्मीदों से देख रहे थे। -- जयन्त कर्माकर, बांग्लादेश में हिंदू अधिकारों के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता
  • उन्होंने हमारे लिए क्या किया? उन्होंने इस्तीफ़ा दिया और भारत भाग गए। हम अत्याचार झेलने के लिए वहीं पड़े रह गए. वो खलनायक नहीं तो और क्या हैं? -- जयन्त कर्माकर, बांग्लादेश में हिंदू अधिकारों के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता
  • जोगेंद्र नाथ पश्चिम बंगाल को अपनी कर्मभूमि बनाना चाहते थे लेकिन उनके अधिकतर दलित हिंदू समर्थकों का उन पर से विश्वास उठ चुका था और उन्होंने मंडल को मसीहा के तौर पर देखना बंद कर दिया था। मंडल अपने पुराने समर्थन और प्रताप को पाने के लिए बीरभूम और 24 परगना ज़िले के शरणार्थी शिविरों में भटकते रहे लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। -- दीप हलधर और अभिषेक बिस्वास, योगेन्द्र मंडल के वापस भारत आकर दलितों का नेतृत्व करने के प्रश्न पर
  • मंडल ने पाकिस्तान के निर्माण में दलित स्वतंत्रता के सपने को साकार होते हुए देखा था, लेकिन नए राज्य में हिंदू अल्पसंख्यक के आंतरिक अंतर को समझे बिना मंडल का विजन टिक नहीं सका। -- गजल आसिफ, अपने शोधपत्र 'जोगेन्द्र नाथ मंडल एंड पॉलिटिक्स ऑफ दलित रिकग्निशन इन पाकिस्तान' में
  • जब मेरे पिता कराची में रहते थे, तब भी उनके मंत्री रहते ही उन्हें पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया था। ...उन्होंने पाकिस्तान में जिन्ना पर भरोसा किया और दलितों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में भारत में अपना सब कुछ त्याग दिया, लेकिन जिन्ना के बाद उसी पाकिस्तान में उन्हें राजनीतिक रूप से अछूत बना दिया गया। -- योगेन्द्र मण्डल के बेटे जगदीश चंद्र मंडल

इन्हें भी देखें

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बाहरी कड़ियाँ

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