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भारत के दुर्ग

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ग्वालियर दुर्ग

भारत के प्राचीनतम दुर्गों के अस्तित्व की पुष्टि दस्तावेज़ों और उत्खनन द्वारा की गई है।

  • यह सच है कि ऋग्वेद हमें इन दुर्गों के आंतरिक विन्यास (layout) का विवरण प्रदान नहीं करता है, लेकिन निश्चित रूप से यह ग्रंथ वास्तुशास्त्र पर कोई शोध प्रबंध होने के लिए नहीं था। यह याद रखा जाना चाहिए कि यह मुख्यतः देवताओं की प्रार्थनाओं का एक संकलन है और इसे इसी रूप में देखा जाना चाहिए। तत्कालीन लोगों की भौतिक संस्कृति के संबंध में यह जो भी साक्ष्य प्रदान करता है, वह केवल प्रासंगिक (incidental) है। -- बी.बी. लाल, Aryan invasion of India, Perpetuation of a myth. उद्धृत: Bryant, E. F., & Patton, L. L. (2005). The Indo-Aryan controversy : evidence and inference in Indian history. Routledge 67
  • कच्ची ईंटों के दुर्गों में बहुत दूर -- ऋग्वेद
  • आहुति लाने वाले दिवोदास के लिए, इंद्र ने पत्थर के सौ दुर्गों को ध्वस्त कर दिया। -- ऋग्वेद 4.30.20 (Griffith 1973, reprint: 221) in Bryant, E. F., & Patton, L. L. (2005). The Indo-Aryan controversy : evidence and inference in Indian history. Routledge 66
  • हे अपराजेय, तुम हमारे लिए लोहे के एक शक्तिशाली दुर्ग के समान बनो, जिसकी सौ दीवारें मनुष्य की रक्षा के लिए हों। -- (ऋग्वेद 7.15.14), (Griffith 1973, reprint: 340) in Bryant, E. F., & Patton, L. L. (2005). The Indo-Aryan controversy : evidence and inference in Indian history. Routledge 66
  • . . . हे देवताओं, कवच के कई और विस्तृत वस्त्र सिलें; सभी हमलावरों से सुरक्षित लोहे के किले बनाएं। -- ऋग्वेद 10.101.8, (Griffith 1973, reprint: 615) in Bryant, E. F., & Patton, L. L. (2005). The Indo-Aryan controversy : evidence and inference in Indian history. Routledge 66

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