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बालकृष्ण शिवराम मुंजे

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बाळकृष्ण शिवराम मुंजे (१२ दिसम्बर १८७२ - ३ मार्च १९४८) भारत के हिन्दू महासभा के नेता थे। वे सन १९२७-२८ में अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बनवाने में इनका बहुत योगदान था। संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के वे राजनितिक गुरु थे। डॉ॰ मुंजे भारत में सैनिक-शिक्षा के पुरोधा थे।

उक्तियाँ

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  • बलिला संस्थाएं (Balilla institutions) और पूरे संगठन का आइडिया मुझे सबसे अधिक पसंद आया, हालांकि अभी भी उच्च स्तर का अनुशासन और संगठन नहीं है। यह पूरा आइडिया इटली के मिलिट्री री-जनरेशन के लिए मुसोलिनी ने सोचा था। इटली के लोग, स्वभाव से, आम तौर पर भारतीयों की तरह आरामपसंद और अपरिपक्व लगते हैं। उन्होंने, भारतीयों की तरह, शांति के काम को बढ़ावा दिया है और युद्ध की कला को बढ़ावा देने को अनदेखा किया है। मुसोलिनी ने अपने देश की ज़रूरी कमज़ोरी देखी और बलिला संगठन का आइडिया सोचा। इटली के मिलिट्री संगठन के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं सोचा जा सकता था। फासीवाद का आइडिया लोगों के बीच एकता के आइडिया को साफ़ तौर पर सामने लाता है। भारत और खासकर हिंदू-भारत को हिंदुओं के मिलिट्री री-जनरेशन के लिए ऐसे किसी संस्थान की आवश्यकता है। --  बी. एस. मुंजे, डायरी की प्रविष्टि से
  • दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं। दुनिया पर एक बड़े युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। ऐसी स्थिति में भारतीय अपनी सुरक्षा को अनदेखा नहीं कर सकते। देश के हर युवा को शारीरिक और सैन्य प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इसे साम्प्रदायिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय मुद्दे के तौर पर दिया जाना चाहिए। -- 18 अगस्त 1930 को एक ऐतिहासिक भाषण में
  • मैंने हिंदू धर्मशास्त्रों पर आधारित एक योजना बनाई है जो पूरे भारत में हिंदू धर्म के मानकीकरण का प्रावधान करती है… लेकिन बात यह है कि इस आदर्श को तब तक साकार नहीं किया जा सकता जब तक हमारे पास शिवाजी या मुसोलिनी या हिटलर जैसे तानाशाह के साथ अपना स्वराज्य न हो। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें जब तक कि भारत में ऐसा कोई तानाशाह न आ जाए। हमें एक वैज्ञानिक योजना बनानी चाहिए और उसका प्रचार-प्रसार करना चाहिए। -- 31 मार्च 1934, मूंजे पेपर्स, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी, नई दिल्ली।
  • फासीवाद का विचार लोगों के बीच एकता की अवधारणा को स्पष्ट रूप से सामने लाता है। भारत और विशेष रूप से हिंदू भारत को हिंदुओं के सैन्य पुनर्जनन के लिए ऐसे किसी संस्थान की आवश्यकता है। डॉ. हेडगेवार के नेतृत्व में नागपुर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हमारा संस्थान इस तरह का है, हालांकि इसकी कल्पना काफी स्वतंत्र रूप से की गई है। -- मार्च 1931 में, मुंजे पेपर्स, नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय, नई दिल्ली।