पेरियार ई. वी. रामास्वामी
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पेरियार ई. वी. रामास्वामी
[सम्पादित करें]ई. वी. रामास्वामी (17 सितम्बर 1879 – 24 दिसम्बर 1973), जिन्हें आमतौर पर पेरियार के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता, दार्शनिक और तर्कवादी थे। उन्होंने जातिवाद, ब्राह्मणवाद और अंधविश्वास के विरुद्ध आवाज़ उठाई और **द्रविड़ आंदोलन** के संस्थापक बने। वे महिलाओं के अधिकार, आत्मसम्मान और तर्कवाद के मजबूत समर्थक थे।
प्रमुख उद्धरण
[सम्पादित करें]- "कोई भी जाति जन्म से महान नहीं होती, महानता कर्म से मिलती है।"
- "धर्म वह दीवार है जो इंसान को इंसान से अलग करती है।"
- "तर्क वह हथियार है जिससे अंधविश्वास की जंजीरें तोड़ी जा सकती हैं।"
- "एक शिक्षित महिला सौ पीढ़ियों को जागरूक बना सकती है।"
- "भगवान का डर इंसान को गुलाम बनाता है। स्वतंत्रता तर्क से मिलती है।"
- "हर आदमी को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए, चाहे उसका जन्म कहीं भी हुआ हो।"
- "स्वाभिमान के बिना जीवन, गुलामी से भी बदतर है।"
- "ब्राह्मणवाद से मुक्ति ही असली स्वतंत्रता है।"
संदर्भ
[सम्पादित करें]- पेरियार के भाषण संग्रह – "Why Religion?" (Self-Respect Movement publications)
- "Collected Works of Periyar" – Volume 1, 2, 3
- तर्कवादी सम्मेलन, मदुरै, 1956
- आत्मसम्मान आंदोलन की पत्रिकाएँ (Kudi Arasu – 1930s)
- "Religion and Society" – Periyar E.V.R. (English trans.)
जीवन दर्शन
[सम्पादित करें]पेरियार ने अपने विचारों के माध्यम से भारतीय समाज के पाखंड, रूढ़िवाद और सामाजिक असमानता पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, दलितों की समानता और तर्क पर आधारित समाज के निर्माण का सपना देखा।