कट्टरता
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(धर्मान्धता से अनुप्रेषित)
कट्टरता (Bigotry) वह मानसिक संकीर्णता है जिसमें व्यक्ति अपने विचारों, विश्वासों या समूह को श्रेष्ठ मानता है और दूसरों के प्रति असहिष्णु या पूर्वाग्रही होता है। यह अक्सर अज्ञानता और तर्कहीनता का परिणाम होती है।
उद्धरण
[सम्पादित करें]- कट्टरता का सबसे बड़ा दोष यह है कि यह व्यक्ति को सोचने की क्षमता से वंचित कर देती है।
- एक कट्टरपंथी वह होता है जो अपना दिमाग नहीं बदल सकता और विषय को बदलना नहीं चाहता।
- कट्टरता अज्ञानता का पुत्र है।
- किसी भी धर्म या विचार में कट्टरता तब आती है, जब उसमें से प्रेम और करुणा लुप्त हो जाती है।
- कट्टरता का अंत तभी संभव है जब मनुष्य स्वयं को श्रेष्ठ मानने का भ्रम त्याग दे।
- अज्ञानी होना उतनी शर्म की बात नहीं है, जितना कि ज्ञान के विरुद्ध कट्टर होना।
- कट्टरता वह दीवार है जो इंसानों को इंसानों से अलग करती है।
- कट्टरपंथी की आंखें केवल वही देखती हैं जो उसका संकीर्ण मन देखना चाहता है।
- घृणा का बीज अक्सर कट्टरता की मिट्टी में ही पनपता है।
- कट्टरता सत्य की खोज में सबसे बड़ी बाधा है।
- दुनिया में जितनी बुराई कट्टरपंथियों ने की है, उतनी शायद ही किसी और ने की हो।
- कट्टरता बुद्धि का पक्षाघात (Paralysis) है।
- — इरास्मस
- जब तर्क समाप्त हो जाता है, तो कट्टरता और हिंसा का जन्म होता है।
- कट्टरता वह जहर है जो समाज की एकता को भीतर से खोखला कर देता है।
- एक कट्टर व्यक्ति वह है जो सत्य की परवाह नहीं करता, केवल अपनी जीत की परवाह करता है।
- कट्टरता का विरोध केवल तर्क से नहीं, बल्कि प्रेम और शिक्षा से ही किया जा सकता है।
- संकीर्ण विचार वाले लोग ही कट्टर होते हैं; विशाल हृदय वाले लोग हमेशा उदार होते हैं।
- कट्टरता की दवा केवल वह ज्ञान है जो हमें विनम्र बनाता है।