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कट्टरता

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कट्टरता (Bigotry) वह मानसिक संकीर्णता है जिसमें व्यक्ति अपने विचारों, विश्वासों या समूह को श्रेष्ठ मानता है और दूसरों के प्रति असहिष्णु या पूर्वाग्रही होता है। यह अक्सर अज्ञानता और तर्कहीनता का परिणाम होती है।

  • कट्टरता का सबसे बड़ा दोष यह है कि यह व्यक्ति को सोचने की क्षमता से वंचित कर देती है।
    महात्मा गांधी
  • एक कट्टरपंथी वह होता है जो अपना दिमाग नहीं बदल सकता और विषय को बदलना नहीं चाहता।
    विंस्टन चर्चिल
  • किसी भी धर्म या विचार में कट्टरता तब आती है, जब उसमें से प्रेम और करुणा लुप्त हो जाती है।
    स्वामी विवेकानन्द
  • कट्टरता का अंत तभी संभव है जब मनुष्य स्वयं को श्रेष्ठ मानने का भ्रम त्याग दे।
    रवीन्द्रनाथ ठाकुर
  • कट्टरपंथी की आंखें केवल वही देखती हैं जो उसका संकीर्ण मन देखना चाहता है।
    थॉमस जेफरसन
  • घृणा का बीज अक्सर कट्टरता की मिट्टी में ही पनपता है।
    मदर टेरेसा
  • दुनिया में जितनी बुराई कट्टरपंथियों ने की है, उतनी शायद ही किसी और ने की हो।
    क्लेरेंस डैरो
  • कट्टरता बुद्धि का पक्षाघात (Paralysis) है।
    इरास्मस
  • जब तर्क समाप्त हो जाता है, तो कट्टरता और हिंसा का जन्म होता है।
    बी. आर. अम्बेडकर
  • एक कट्टर व्यक्ति वह है जो सत्य की परवाह नहीं करता, केवल अपनी जीत की परवाह करता है।
    विक्टर ह्यूगो
  • कट्टरता का विरोध केवल तर्क से नहीं, बल्कि प्रेम और शिक्षा से ही किया जा सकता है।
    महात्मा बुद्ध
  • संकीर्ण विचार वाले लोग ही कट्टर होते हैं; विशाल हृदय वाले लोग हमेशा उदार होते हैं।
    मुंशी प्रेमचंद

इन्हें भी देखें

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