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जैन धर्म

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जैन धर्म के सिद्धांत

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  • "सव्वे पाणा न हंतव्या, न हिंसिज्जा कदाचणं।
 अहिंसा एव धम्मो सव्वेषु भूतेसु सारहो॥"  
 (अनुवाद: "किसी भी प्राणी को न मारो, न हिंसा करो। अहिंसा ही सभी प्राणियों के लिए सर्वोत्तम धर्म है।")  
 ― सूत्रकृतांग १.११.१० (जैन आगम)
  • "जो प्राणी मारता है, वह पाप का भागी होता है।
 जो मरवाता है, वह उससे भी बड़ा पापी।  
 और जो हिंसा को देखकर भी अनदेखा करे, वह सबसे बड़ा अधर्मी।"  
 ― जैन सिद्धांतों पर आधारित हिंदी व्याख्या

अपरिग्रह (अनासक्ति)

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  • "जितना कम संग्रह करोगे, उतना ही मोक्ष के निकट होगे।"
तत्त्वार्थ सूत्र ७.१

प्रसिद्ध जैन विद्वानों के विचार

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  • महावीर स्वामी:
 "सभी प्राणियों के प्रति दया ही सच्चा धर्म है।"
  • प्राथमिक स्रोत:
 सूत्रकृतांग, आचारांग सूत्र (मूल प्राकृत ग्रंथ)  
  • हिंदी अनुवाद:
 "जैन दर्शन: मूल सिद्धांत", जैन विश्वभारती प्रकाशन  
  • बाहरी कड़ियाँ:
 जैनवर्ल्ड.कॉम