घरेलू महिलाएँ
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घरेलू महिलाएँ
[सम्पादित करें]परिचय
[सम्पादित करें]घर संभालने वाली महिलाएँ बिना वेतन, बिना छुट्टी, और बिना पहचान के अनगिनत भूमिकाएँ निभाती हैं। उनके अनुभव और विचार समाज की सबसे मजबूत बुनियाद होते हैं।
उद्धरण
[सम्पादित करें]- "जो घर को सहेजती है, वही समाज को गढ़ती है।"
- "रसोई में खड़ी माँ, देश की सबसे बड़ी योजनाकार है।"
- "घर की दीवारें औरत की ख़ामोश मेहनत से खड़ी रहती हैं।"