इस्मत चुगताई
इस्मत चुग़ताई उर्दू की एक प्रमुख लेखिका होने के साथ-साथ एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थीं। उनके लेखन ने समाज को झकझोर कर रख दिया था और उस समय मजहब की चार दीवारी में प्रताड़ित होती प्रताड़ित महिलाओं को आवाज़ दी।
इस्मत चुग़ताई का जन्म 21 अगस्त, 1915 को भारत के लाहौर में हुआ था।1936 में… स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता, सामाजिक दोहरेपन और मानवीय भावनाओं पर बड़ी ही बेबाकी से अपनी राय अपने लेखों में लिखी थी। उन्होंने अपने समय की कई रूढ़ियों को तोड़ने का जिम्मा उठाया और उसमें काफी हद तक वह सफ़ल भी हुईं। उनकी कहानियों और उपन्यासों में महिलाओं के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दिखाया गया है।
इस्मत चुग़ताई की प्रमुख कहानियों में “लिहाफ़”, “फूलों का हार”, “ज़िंदगीनामा”, “जैसे कि” तथा प्रमुख उपन्यासों की श्रेणी में “टेढ़ी लकीर”, “उसकी कहानी”, “फ़िलहाल” इत्यादि को गिना जाता है। साहित्य में अपना योगदान देने के लिए वर्ष 1961 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से तथा वर्ष 1981 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। 24 अक्टूबर, 1991 को उर्दू की एक महान लेखिका इस्मत चुग़ताई जी का निधन लाहौर में हुआ था। [१] साँचा:हिन्दी उद्धरण साँचा:महिला लेखक साँचा:साहित्यकार
लेखन दृष्टिकोण
[सम्पादित करें]इस्मत चुगताई की लेखनी बेबाक, निडर और यथार्थवादी थी। उन्होंने महिलाओं की इच्छाओं, मनोभावों और सामाजिक पाखंड पर खुले तौर पर लिखा।
बाहरी कड़ियाँ
[सम्पादित करें]उक्तियाँ
[सम्पादित करें]- औरत अपने घर की दीवारों के अंदर एक पिंजरे में बंद चिड़िया होती है, जिसके पंख छोटे कर दिए गए हैं।
- एक औरत वही चिड़िया है जो अगर अपने पिंजरे के दरवाजे खोल दे और बाहर हवाओं में उड़ान भर ले, तो उसे दुनिया पागल कहती है।
- औरतों को औरतों से अधिक समझने का दावा न कीजिए तो अच्छा है। हम खुद उन गुत्थियों को सुलझा नहीं पाए हैं, जिन्हें आप सुलझा लेने का दावा करते हैं।
- मर्द के बिना औरत का अस्तित्व नहीं होता, यह झूठ है!
- औरत का अस्तित्व है, वो सिर्फ अपनी शर्तों पर जीना चाहती है।
- यह समाज जो औरत की आवाज़ बंद कर देना चाहता है, उसकी इच्छाओं को कुचल देना चाहता है, वही समाज उसके शरीर पर तमाशा करता है, उसकी बेज्जती उड़ाता है।
- हमारी संस्कृति ने औरत के शरीर को शर्म का पर्दा पहना दिया है, लेकिन मर्द के शरीर को नहीं। ये दोहरापन ही हमारे समाज की सबसे बड़ी बीमारी है।
- प्रेम और नफरत के दरमियान एक पतली सी लकीर होती है, जिसे पार करना कभी-कभी बहुत आसान होता है।
- जिंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल किसी को पाना नहीं है, बल्कि उसे खोने के बाद खुद को बचाकर रखना है।
- हर इंसान के अंदर एक अंधेरा कोना होता है, जिसे वो दुनिया से छुपाता है। वही अंधेरा कभी-कभी सबसे सच्चा होता है।
- अपने अंदर झांकने की हिम्मत रखो, वहां बहुत सारी कहानियां छिपी हुई हैं।
- जो समाज का बनाया हुआ रास्ता चलता है, वो कभी मंजिल तक नहीं पहुंच पाता।
- सच बोलना मुश्किल होता है, लेकिन झूठ बोलकर जीना और भी मुश्किल होता है।
- पढ़ना मत रोको, लिखना मत रोको, सोचना मत रोको।
- मैं अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूं, क्या यह बहुत बड़ा सपना है?
- किसी की आवाज बन्द करना आसान है, लेकिन सच को दबाना मुश्किल होता है।
- जो किताबें औरतों की कहानियां नहीं सुनातीं, वो अधूरी हैं।
- "औरत का अस्तित्व है, वो सिर्फ अपनी शर्तों पर जीना चाहती है।"
- "A woman has an identity; she just wants to live on her own terms."
- ↑ Ismat Chughtai, *Tedhi Lakeer*, 1943