अरविन्द गुप्ता
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अरविन्द गुप्ता एक भारतीय विचारक हैं जिन्हें घर के कबाड़ से खिलौने बनाने में महारत हासिल है। आईआईटी से उतीर्ण अरविन्द ने हजारों स्कूल में बच्चों को कबाड़ से खिलौना बनाकर पढ़ाने में मदद की। आईआईटी कानपुर से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा क्षेत्र को समर्पित कर दिया। फिलहाल, अरविंद पुणे में 'चिल्ड्रेन साइंस सेंटर' का संचालन करते हैं और बच्चों को खिलौने बनाना सीखाते हैं और इसके जरिए बच्चों को विज्ञान और गणित पढ़ाते हैं।
उक्तियाँ
[सम्पादित करें]- इस त्वरक (एक्सेलरेटर) का एक बड़ा हिस्सा वैज्ञानिकों को उद्यमी बनने में मदद करना है। मैं यह सोचना पसंद करता हूँ कि प्रत्येक व्यवसाय तीन प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित होता है: मूल्य सृजन, उत्पाद निर्माण और मूल्य निष्कर्षण। हम इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में सहायता प्रदान करते हैं।
- जीवविज्ञान अब तक विकसित की गयी सबसे शक्तिशाली प्रौद्योगिकी है। डीएनए सॉफ्टवेयर है, प्रोटीन हार्डवेयर है, कोशिकाएँ कारखाने हैं।
- जीवविज्ञान इस समय मूर के नियम से भी अधिक तेज गति से आगे बड़ रहा है।
- इंडीबायो की पूँजी, सुविधाएँ और जैव-प्रौद्योगिकी - विशिष्ट विशेषज्ञों के नेटवर्क द्वारा गहन मार्गदर्शन, जीव विज्ञान के क्षेत्र में गूगल, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे दिग्गजों को जन्म देने की क्षमता रखता है।
- संसार में खरबों डॉलर की अगणित समस्याएँ हैं जिनका समाधान होना बाकी है, और जीवविज्ञान ही ऐसा करने का एकमात्र तरीका है।
- मेरा मानना था कि जीव विज्ञान और वृहद अर्थव्यवस्थाएँ, विशेष रूप से, दोनों प्रणालियों के स्तर पर काफी हद तक संबंधित हैं, इसलिए मैंने विश्वविद्यालय से जेनेटिक इंजीनियरिंग और अर्थशास्त्र में डिग्री प्राप्त की, और केवल विचारों से ही पैसा कमाने का तरीका जानने के लिए सैन फ्रांसिस्को चला गया।
- वैश्विक खाद्य आपूर्ति शृंखला एक बहु-खरब डॉलर का उद्योग है। यही वह बाज़ार है जिसे हम बदलने के बारे में सोच रहे हैं।
- बहुत से लोगों ने कहा कि यह असंभव है। 'आप 50,000 डॉलर में बायोटेक नहीं बना सकते। आप 50,000 डॉलर में कुछ भी नहीं बना सकते।' खैर, यह अब सच नहीं है, और हम इसे साबित कर रहे हैं।
- कहीं न कहीं ऐसे इंजीनियर भी हैं जो दूसरों को ध्वनि से भी तेज़ उड़ान भरने में मदद कर रहे हैं। लेकिन ऐसे इंजीनियर कहाँ हैं जो उन लोगों की मदद करें जिन्हें ज़मीन पर रहना पड़ता है?
- यदि भारत विश्व की बड़ी शक्तियों के स्तर तक की उन्नति करना चाहता है तो इसके पास धन-सम्पदा, सैन्य शक्ति, उन्नत अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी तो होना ही चाहिये, इनके अलावा भारत को उन विचारों के क्षेत्र में भी योगदान देने में सक्षम होना पड़ेगा जो आज की समस्याओं को हल करने में सहायक हों।
- प्राचीन भारतीय ग्रंथों के सरसरी अध्ययन से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि हमारे पूर्वजों का भौतिक वास्तविकता के साथ-साथ आध्यात्मिकता पर भी एक परिष्कृत और सूक्ष्म दृष्टिकोण था। वे दोनों में समान रूप से रुचि रखते थे। ये विचार आज भी भारतीय जनमानस को प्रभावित करते हैं।[१]