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अबुल कलाम आज़ाद

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मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का पूरा नाम था- अबुल कलाम मोहिउद्दीन अहमद। उनका जन्म सऊदी अरब में मक्का में हुआ था। उनके पिता ख़ैरुद्दीन 1857 के विद्रोह से पहले सऊदी अरब चल गए थे। वहां उन्होंने 30 साल बिताए थे। ख़ैरुद्दीन अपने परिवार सहित 1895 में भारत वापस लौटकर कलकत्ता में बस गए थे। अबुल कलाम ने किसी स्कूल, मदरसे या विश्वविद्यालय में शिक्षा नहीं ली थी बलिकि सारी पढ़ाई घर पर ही की थी। उनके पिता उनके पहले शिक्षक थे। जब आज़ाद 11 साल के थे तभी उनकी माँ का देहान्त हो गया और उसके 11 साल बाद उनके पिता भी चल बसे थे।

वे अरबी भाषा के बहुत बड़े जानकार और इस्लामी धर्मग्रंथों के विद्वान बन गए थे। सऊदी अरब में उन्होंने एक नहर की मरम्मत में मदद की थी, अरबी में एक क़िताब लिखी थी और अरब की ही एक महिला आलिया से शादी की थी। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे एवं भारत के विभाजन (पाकिस्तान के निर्माण) के विरोधी थे।

उक्तियाँ

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  • बीस के दशक में कांग्रेस छोड़ देने के बाद जिन्ना अपनी राजनीतिक महत्ता खो चुके थे लेकिन गांधी जी की वजह से जिन्ना को भारतीय राजनीति में वापस आने का मौक़ा मिल गया। भारतीय मुसलमानों के एक बहुत बड़े वर्ग को जिन्ना की राजनीतिक क्षमता के बारे में संदेह था लेकिन जब उन्होंने देखा कि गांधीजी जिन्ना के पीछे भाग रहे हैं तो जिन्ना के लिए उनके मन में नया सम्मान पैदा हो गया। -- अबुल कलाम, अपनी आत्मकथा 'इंडिया विंस फ़्रीडम' में
  • गांधी जी ने ही जिन्ना के लिए अपने पत्र में 'क़ायद-ए-आज़म' शब्द का प्रयोग किया। ये पत्र तुरंत ही अख़बारों में छपवा दिया गया। जब मुसलमानों ने देखा कि गांधी जी जिन्ना को 'क़ायद-ए-आज़म' कहकर संबोधित कर रहे हैं तो ज़रूर उनमें ख़ास बात होगी। -- अबुल कलाम, अपनी आत्मकथा 'इंडिया विंस फ़्रीडम' में
  • नेहरू के रवैए की वजह से जिन्ना लीग के उत्तर प्रदेश घटक का समर्थन बनाए रखने में कामयाब हो गए जो कि एक समय जिन्ना का साथ छोड़ने के लिए तैयार था। नेहरू के इस कदम से मुस्लिम लीग को उत्तर प्रदेश में नई जान मिल गई। जिन्ना ने इसका पूरा फ़ायदा उठाया और आख़िर में इसका नतीजा ये हुआ कि पाकिस्तान बन गया। -- अबुल कलाम, अपनी आत्मकथा 'इंडिया विंस फ़्रीडम' में
  • जब हिंदु बहुल देश से लाखों मुसलमान जागेंगे तो वो पाएंगे कि अपने ही देश में पराए और विदेशी बन गए हैं। -- भारत के विभाजन और हिन्दू-मुसलमानों की अदला-बदली पर
  • मैं एक क्षण के लिए भी पूरे भारत को अपनी मातृभूमि न मानने और उसके केवल एक हिस्से से संतुष्ट होने के लिए तैयार नहीं हूँ।
  • मुझे बहुत दुख और आश्चर्य हुआ जब सरदार पटेल ने अंतरिम सरकार में ध्रुवीकरण से तंग आकर मुझसे स्वीकार किया, 'हम इसे पसंद करें या न करें, भारत में दो राष्ट्र हैं।' नेहरू ने भी मुझसे दुखी स्वर में कहा कि आप विभाजन का विरोध करना बंद कर दीजिये।
  • मौलाना ने उत्तर प्रदेश से पाकिस्तान जाने वाले मुसलमानों से कहा, आप अपनी मातृभूमि को छोड़कर जा रहे हैं. क्या आपको पता है कि इसका परिणाम क्या होगा? इस तरह आपका जाना भारत के मुसलमानों को कमज़ोर करेगा। -- सैयदा सैयदेन हमीद, अपनी क़िताब 'मौलाना आज़ाद, इस्लाम एंड द इंडियन नैशनल मूवमेंट' में
  • एक समय ऐसा भी आएगा जब पाकिस्तान के अलग-अलग क्षेत्र अपनी अलग पहचान बताना शुरू कर देंगे। हो सकता है कि बांग्ला, पंजाबी, सिंधी और बलोच अपने आपको अलग राष्ट्र घोषित कर दें। पाकिस्तान में आपकी स्थिति क्या बिन बुलाए मेहमान की नहीं होगी? हिंदू आपके धार्मिक प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं लेकिन क्षेत्रीय और राष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी कतई नहीं। -- सैयदा सैयदेन हमीद, अपनी क़िताब 'मौलाना आज़ाद, इस्लाम एंड द इंडियन नैशनल मूवमेंट' में
  • दिल से दी गयी शिक्षा समाज में क्रांति ला सकता है।
  • बहुत सारे लोग पेड़ लगाते हैं, लेकिन उनमें से कुछ को ही उसका फल मिलता है।
  • मुझे एक भारतीय होने पर गर्व है। मैं एक अविभाज्य एकता का हिस्सा रहा हूँ जो कि भारतीय राष्ट्रीयता है। मैं इस भव्य संरचना का अपरिहार्य अंग हूँ और मेरे बिना यह शानदार संरचना अधूरा है। मैं एक आवश्यक तत्व हूँ जो भारत का निर्माण के लिए कटिबद्ध है।
  • हमें एक पल के लिए भी यह नहीं भूलना चाहिए कि हरेक व्यक्ति का यह जन्मसिद्ध अधिकार है कि उसे बुनियादी शिक्षा मिले, बिना इसके वह पूर्ण रूप से एक नागरिक के अधिकार का निर्वहन नहीं कर सकता।
  • गुलामी अत्यंत बुरा होता है भले ही इसका नाम कितना भी खुबसूरत क्यों न हो।
  • अपनी शिक्षा के प्रारंभिक चरण में, किसी बच्चे को उसकी अपनी मातृभाषा के माध्यम से निर्देश दिया जाना चाहिए, इसे सरकार ने अपनी नीति के रूप में स्वीकार किया है।
  • हमारे बचपन से ही अंग्रेजी भाषा का लगातार उपयोग करना ताकि हम अपने विचार को हमारी मातृभाषा में व्यक्त करने की बजाय उसी भाषा में करने लगें तो यह हमें अराष्ट्रवादी बना देगा। यदि हम पूर्वी लोग बने रहना चाहते हैं, तो हमें उस भाषा का तिरस्कार नहीं करना चाहिए जिसे हमें माँ की गोद में सीखा है… इसे भूलने के लिये, या इससे घृणा करने के लिए … राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में सबसे मजबूत कारकों में से यह एक है।
  • अगर एक विशेषता जो आधुनिक भारत को दूसरों से अलग बनाता है, वह लोकतंत्र की भावना का विकास जो अपने सभी नागरिकों को अवसर की समानता प्रदान करता है. पहले के सभी अवरोध जो जन्म, विशेषाधिकार, जाति या धन पर आधारित थे, टूट रहे हैं. एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक राज्य के रूप में, हम अवसरों और सभी के लिए अवसर की समानता को विस्तृत करने को प्रतिबद्ध हैं।
  • जो व्यक्ति संगीत से स्पंदित नहीं होता, उसका मन अस्वस्थ और अपूर्ण है, वह आध्यात्मिकता से दूर है और पक्षियों और जानवरों की तुलना में सघन है क्योंकि हर कोई संगीत की मधुर ध्वनि से प्रभावित होता है।
  • भारत नृत्य, नाटक, और संगीत के क्षेत्र में लंबी विरासत और परंपरा पर गर्व किया जा सकता है। ललित कला के क्षेत्र में, दर्शन और विज्ञान की भांति ही, भारत और ग्रीस मानव इतिहास में लगभग एक अद्वितीय स्थान रखते हैं। मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि संगीत के क्षेत्र में भारत की उपलब्धि ग्रीस की तुलना में अधिक है। मुखर और वाद्य संगीत के अपने एकीकरण के रूप में भारतीय संगीत की चौड़ाई और गहराई शायद बेजोड़ है।

अबुल कलाम के बारे में अन्य नेताओं के विचार

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  • मैं आपके साथ न तो कोई बात करना चाहता हूँ और न ही कोई पत्राचार। आप भारतीय मुसलमानों का विश्वास खो चुके हैं। क्या आपको इस बात का अंदाज़ा है कि कांग्रेस ने आपको दिखावटी मुसलमान अध्यक्ष बनाया है? आप न तो मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करते हैं और न ही हिंदुओं का। अगर आप में ज़रा भी आत्मसम्मान है तो आप कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दीजिए। -- मुहम्मद अली जिन्ना, अबुल कलाम द्वारा जिना को समजाने की कोशिश में लिखे एक पत्र के उत्तर में
  • आज़ाद ने कहा कि हज़ार साल पहले नियति ने हिंदुओं और मुसलमानों को साथ आने का मौक़ा दिया। हम आपस में लड़े ज़रूर लेकिन सगे भाइयों में भी लड़ाई होती है। हम दोनों के बीच मतभेदों पर ज़ोर देने से कोई फल नहीं निकलेगा क्योंकि दो इंसान एक जैसे ही तो होते हैं। शांति के हर समर्थक को इन दोनों के बीच समानता पर ज़ोर देना चाहिए। -- महादेव देसाई, आज़ाद की जीवनी में
  • आज़ाद के पास कभी भी सही शब्दों की कमी नहीं रहती थी और कांग्रेस की बैठकों में सबसे ज़्यादा बोलने वालों में आज़ाद ही हुआ करते थे। -- महात्मा गांधी के सचिव रहे महादेव देसाई
  • आज़ाद का ये सोचना ग़लत नहीं है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम लीग-कांग्रेस की बातचीत नाकाम होने के बाद ही पाकिस्तान की नींव रखी गई थी। -- चौधरी ख़लीकुज़्ज़माँ, अपनी क़िताब 'पाथवे टू पाकिस्तान' में
  • मौलाना आज़ाद विद्वान मुस्लिम अध्येता तो थे ही लेकिन उन्हें दुनिया की अच्छी चीज़ें भी पसंद थीं। जब वो शिक्षा मंत्री के रूप में पश्चिमी जर्मनी की यात्रा पर गए थे तो वहां भारत के राजदूत एसीएन नाम्बियार ने उन्हें अपने घर में ठहराया। उन्हें पता था कि मौलाना शराब के शौकीन हैं, इसलिए उन्होंने उनके लिए अपने घर में एक छोटा बार बनाया। -- नेहरू के सचिव रहे एमओ मथाई अपनी क़िताब 'रेमिनिसेंसेज़ ऑफ़ नेहरू एज' में
  • मौलाना विदेश यात्रा के दौरान शैंपेन पीना पसंद करते थे। वो अकेले शराब पीते थे और नहीं चाहते थे कि इस दौरान दूसरा कोई उनके साथ हो। नाम्बियार ने मौलाना के सम्मान में कई जर्मन मंत्रियों को आमंत्रित किया था लेकिन जैसे ही भोज समाप्त हुआ आज़ाद डायनिंग रूम छोड़कर अपने कमरे में आकर अकेले शैंपेन पीने लगे। -- नेहरू के सचिव रहे एमओ मथाई अपनी क़िताब 'रेमिनिसेंसेज़ ऑफ़ नेहरू एज' में
  • दिल्ली में मौलाना कभी भी रात्रि भोज पर नहीं जाते थे। नेहरू के आवास पर भी विदेशी मेहमानों के सम्मान में दिए गए दिन के भोज में ही शामिल होते थे। मंत्रिमंडल की बैठक में भी जिसका आम तौर से समय पांच बजे शाम का होता था, मौलाना ठीक छह बजे उठ खड़े होते थे चाहे कितने ही महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा चल रही हो, अपने घर पहुंचकर वो विस्की, सोडा और समोसे की एक प्लेट मंगवा लेते थे। -- नेहरू के सचिव रहे एमओ मथाई अपनी क़िताब 'रेमिनिसेंसेज़ ऑफ़ नेहरू एज' में
  • हमने किसी पर आक्रमण नहीं किया है। हमने किसी पर विजय प्राप्त नहीं की है। हमने उनकी जमीन, उनकी संस्कृति, उनके इतिहास को नहीं पकड़ा है और उन पर हमारे जीवन के तरीके को लागू करने की कोशिश की है।
  • शिक्षाविदों को छात्रों में पूछताछ, रचनात्मकता, उद्यमशीलता और नैतिक नेतृत्व की भावना का निर्माण करना चाहिए और उनका आदर्श बनना चाहिए।
  • शीर्ष पर चढ़ना ताकत की मांग करता है, चाहे वह माउंट एवरेस्ट के शीर्ष पर हो या आपके करियर के शीर्ष पर।
  • अपने मिशन में सफल होने के लिए, आपके पास अपने लक्ष्य के लिए एकल-दिमाग वाली भक्ति होनी चाहिए।
  • अपने सपने सच करने से पहले आपको सपने देखने होंगे।
  • क्या हमें यह एहसास नहीं है कि आत्म-सम्मान आत्मनिर्भरता के साथ आता है?
  • महान सपने देखने वालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।
  • तेज लेकिन सिंथेटिक खुशी के बाद चलने की तुलना में ठोस उपलब्धियां बनाने के लिए अधिक समर्पित रहें।
  • सुंदर नामों को धारण करने पर भी गुलामी सबसे बुरी है।
  • भगवान के एक बच्चे के रूप में, मैं उस चीज से बड़ा हूं जो मेरे साथ हो सकता है।
  • जीभ से पढ़ाने को सहन किया जा सकता है लेकिन अच्छे काम से मजबूत बने रह सकते हैं।
  • जो संगीत से प्रभावित नहीं होता वह मानसिक रूप से अस्वस्थ और असंयमी होता है।
  • ईश्वर की संतान होने के नाते, जो कुछ भी मेरे साथ घटित हो सकता है, मैं उससे बड़ा हूँ।
  • शिक्षा देने में पसीना आ सकता है लेकिन अच्छे काम से शिक्षा मजबूत बनी रह सकती है।

इन्हें भी देखें

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