अजित डोभाल
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अजित डोभाल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं।
उक्तियाँ
[सम्पादित करें]- भारत में धर्म-आधारित संघर्षों को शास्त्रार्थ और ध्यान के माध्यम से हल किया जाता था। धर्म और विचारधाराएं प्रतिस्पर्धी होती हैं, अगर वे प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगी तो वे ठहराव का शिकार हो जाएंगी और अंततः नष्ट हो जाएंगी।
- राज्य और समाजों के लिए आत्मनिरीक्षण बेहद जरूरी है। देश और धर्म के प्रति निष्ठा से समझौता नहीं होना चाहिए। हमें अपने दिमाग को कैद नहीं होने देना चाहिए। अगर आत्मनिरीक्षण नहीं करते हैं तो समय और दिशा दोनों खो देते हैं।
- वे पीढ़ियां जो बक्से से बाहर नहीं सोच सकती थीं, वे स्थिर हो गईं। अगर हम कोई बदलाव चाहते हैं, कोई प्रगति चाहते हैं, तो हमें इस बात पर जरूर विचार करना होगा कि आखिर कुछ समाज क्यों जड़ हो गए? जो समाज नए विचार, नए विचार उत्पन्न नहीं कर सके, लीक से हटकर नहीं देख सके और चीजों को मौलिक रूप से नहीं देख सके, शायद वे एक समय पर जड़ हो गए।
- विचारों के प्रवाह को बाधित करने से समाज ठहराव की ओर बढ़ जाता है। प्रिंटिंग प्रेस को अपनाने का विरोध इस बात का प्रमाण है कि किस तरह से धार्मिक नेताओं ने इसे इस डर से रोका कि इससे इस्लाम की व्याख्या उनकी मान्यताओं के अनुसार नहीं होगी।
- ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सेना की सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन हुआ, जिसमें पाकिस्तान में 9 आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया। हमें पता था कि कौन कहां है, जबकि हमारे यहां एक शीशा भी नहीं टूटा।
- तो पाकिस्तान से कैसे निबटें? ... आपको पता है, किसी दुश्मन से तीन तरीकों से निबटते हैं- पहला तो सुरक्षात्मक तरीक होता है. ... इसमें ऐसा होता है कि अगर कोई हमारे पास आता है तो हम उसे कुछ भी करने से रोकेंगे और अपनी रक्षा करेंगे। दूसरा है सुरक्षा करने के साथ वापस हमला करना। इस मामले में हम अपनी सुरक्षा के लिए वहां तक जाते हैं जहां से हम पर हमला हो रहा है। और तीसरा हमलावर रुख होता है जिसमें आप किसी बात की परवाह नहीं करते. ... हम आज सिर्फ सुरक्षात्मक लहजे में काम कर रहे हैं। अब, जब हम सुरक्षात्मक-हमलावर रुख अपनाते हैं तब हम पाकिस्तान की कमजोरियों पर काम कर रहे होते हैं। ... पाकिस्तान की कमजोरियां भारत की तुलना में कई कई गुना बड़ी हैं। जैसे ही उन्हें पता चलेगा कि भारत ने सुरक्षात्मक की जगह सुरक्षात्मक आक्रमक नीति अपना ली है, वो इसका सामना करने की स्थिति में नहीं होगा। -- २०१४ में बनाए एक यू-ट्यूब में अजित डोभाल
- भारत को बाहर की अपेक्षा भीतर से ज्यादा खतरा है जिसमें बंगलादेशी घुसपैठ शामिल है। -- वर्ष 2006 में दिए गए एक साक्षात्कार में
- भारत में कई समस्याएं हैं जिनमें- जातिय, धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषाई और जाति की समस्याएं हैं।...भारत की आंतिरक कमजोरियों के पीछे राजनीतिक कारण भी हैं. ... किसी विशेष समुदाय का वोट पाने के लिए मुझे उनके पक्ष का काम करना होगा। अगर अल्पसंख्य और बहुसंख्यक एक-दूसरे से डरे हुए नहीं होंगे, तो वोट बैंक समाप्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में नेताओं को वोटरों के दिमाग को असली या काल्पनिक भय भरना पड़ता है। राजनीति में सफलता की चाबी यही है कि लोगों के अंदर डर का राज कायम करो और नए डर पैदा करते रहो।
- हम अपने राष्ट्र-निर्माण को विविधता पर आधारित नहीं बना सकते। कोई राष्ट्र एकता की शक्तियों को कमजोर करके मजबूत नहीं बन सकता और हम विविधता को इसलिए मजबूत नहीं कर सकते क्योंकि हमारी संस्कृति विविध है।
- किसी की निजी नैतिकता को समाज और देश के व्यापक हित के ऊपर नहीं लागू किया जा सकता। ... और, इसलिए, देश को उन सभी माध्यमों का सहारा लेना होगा जो इसकी सुरक्षा के लिहाज से अहम हैं। ये सिर्फ इस पीढ़ी के लिए नहीं बल्कि आने वाली सभी पीढ़ियों के लिए लागू होता है। -- साल 2015 में दिए गए व्याखान में
- मैं उत्तराखंड के एक ब्राह्मण परिवार से हूं और मेरा परिवार पारंपरिक तौर पर शाकाहारी रहा है। मेरी पोस्टिंग सात सालों के लिए पूर्वोत्तर में हो गई और उसके बाद सात सालों के लिए मैं पाकिस्तान भेज दिया गया। ... मुझे मांसाहार पसंद नहीं था। ऐसा नहीं था कि मैं किसी तरह का मांसाहारी खाना नहीं खाता था लेकिन तब मुझे ये बहुत ज्यादा पसंद नहीं था। लेकिन फिर एक समय आया जब मैं और कुछ नहीं बल्कि सिर्फ मांसाहारी खाना खाने लगा। जब आप व्यापक सामाजिक आदर्शों से जुड़े प्रश्नों का सामना कर रहे होते हैं तब इसमें आपके खुद के लिए जगह नहीं होती।
- अगर भारत ने सार्वभौमिक भाईचारे पर उपदेश देना बंद कर दिया होता और हमने मजबूती दिखाई होती तो अभी की तुलना में बहुत ज्यादा शांति होती। हमने सार्वभौमिक भाईचारे पर लंबे समय और कई सदियों तक उपदेश देने का काम किया है। हमने अपने दुश्मनों को उकसाया है। ... कमजोर होना किसी दूसरे को हिंसा के लिए उकसाने का सबसे बड़ा कारण है। सार्वभौमिक भाईचारे की हत्या इसलिए कर दी जाएगी क्योंकि आप कमजोर हैं.।... धर्म पर जीत हासिल कर ली जाएगी क्योंकि आप कमजोर हैं। -- 2010 में “विश्वविद्यालय भाईचारा दिवस” के मौके पर हुए एक समारोह में भाषण देते हुए