प्रेमचंद

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प्रेमचंद

मै एक मजदूर हूँ । जिस दिन कुछ लिख न लूँ , उस दिन मुझे रोटी खाने का कोई हक नहीं।

वैयक्तिक औज़ार
नामस्थान

संस्करण
क्रियाएं
भ्रमण
साधन पेटी