आचार्य रजनीश

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ेमें अमीर आदमी का गुरू हूँ

यथार्थवादी बनो: चम्त्कार की योजना बनाओ

तुम कहते हो की स्वर्ग में शाश्वत सौंदर्य है ,शाश्वत सौंदर्य अभी है यहाँ ,स्वर्ग में नही

जब तुम नही होगे ,तब तुम पहली बार होगे

मसीहा को मरे जितना समय हो जाता है कर्मकांड उतना ही परबल हो जाता है , अगर आज बुध जीवीत होते तो तुम उन्हें पसंद न करते

मेरी सारी शिक्शा दो शब्दो की है परेम और धयान

वैयक्तिक औज़ार